केरल विश्वविद्यालय परिसर में राजनीतिक गतिविधियों पर रोक संबंधी मसौदा नियमों को लेकर विरोध बढ़ा
केरल विश्वविद्यालय परिसर में राजनीतिक गतिविधियों पर रोक संबंधी मसौदा नियमों को लेकर विरोध बढ़ा
तिरुवनंतपुरम, 20 सितंबर (भाषा) केरल विश्वविद्यालय छात्र आचार संहिता नियमावली के मसौदे में प्रस्तावित प्रावधानों को लेकर विरोध बढ़ गया है। मसौदे में परिसर और संबद्ध कॉलेजों में राजनीतिक गतिविधियों को सीमित करने का प्रस्ताव है। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि नियमों को अभी अंतिम मंजूरी नहीं मिली है और न ही इन्हें लागू किया गया है।
वाम-समर्थक ‘केरल विश्वविद्यालय कर्मचारी यूनियन’ के सदस्यों के अनुसार, विश्वविद्यालय सिंडिकेट ने हाल में इन मसौदा नियमों पर विचार किया। इन नियमों में छात्र संगठनों द्वारा विरोध-प्रदर्शन, धरना, नए सदस्य बनाना, दीवारों पर पोस्टर और नारे लिखना, चंदा इकट्ठा करना, राजनीतिक हस्तियों के साथ कार्यक्रम आयोजित करना और ऑनलाइन चुनाव प्रचार करने पर रोक लगाने जैसी बातें शामिल हैं।
यूनियन के सदस्यों ने कहा कि मसौदे में विश्वविद्यालय परिसर के विभागाध्यक्षों और संबद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्यों को प्रस्तावित नियमों का उल्लंघन करने वाले छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार देने की बात कही गई है। इसमें निलंबन जैसी कार्रवाई भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि हिंसक गतिविधियों में शामिल छात्रों को एक साल के निलंबन का सामना करना पड़ सकता है तथा प्रस्तावित दंड में छात्रों पर 5,000 रुपये, राजनीतिक संगठनों पर 10,000 रुपये और बार-बार उल्लंघन करने पर एक लाख रुपये का जुर्माना शामिल है।
बकाया जुर्माना देय राशि माना जाएगा और इसके कारण राजस्व वसूली तथा संभावित रूप से संपत्ति कुर्क की जा सकती है। साथ ही, परीक्षा के नतीजे रोके जा सकते हैं और ‘भारतीय न्याय संहिता’ व ‘सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम’ के तहत आपराधिक कार्रवाई भी हो सकती है।
‘केरल विश्वविद्यालय कर्मचारी यूनियन’ ने इन प्रस्तावित नियमों का विरोध किया है। उनका कहना है कि ये नियम परिसर में राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश हैं और अलोकतांत्रिक हैं।
यूनियन ने कहा है कि अगर ये नियम लागू किए गए तो वे प्रदर्शन करेंगे। उनका आरोप है कि ऐसी पाबंदियों से संगठनात्मक गतिविधियों में छात्रों की भागीदारी कम हो जाएगी।
केरल विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार रेशमी आर ने रविवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि अभी सिर्फ एक मसौदा तैयार किया गया है और इसे अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।
इस बीच, केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने परिसरों में छात्र संगठनों पर प्रस्तावित पाबंदियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि परिसरों से राजनीति और राजनीतिक जागरूकता को दूर करने के प्रयास ऐसे लोगों के डर को दर्शाते हैं जो सवाल पूछने वाली पीढ़ी से परेशान हैं।
विजयन ने शनिवार रात सोशल मीडिया मंच ‘फेसबुक’ पर एक पोस्ट में कहा कि यह फैसला देशभर में उभरे छात्र आंदोलनों से परेशान लोगों के एजेंडे का हिस्सा नजर आता है।
उन्होंने कहा, ‘यदि इस अलोकतांत्रिक फैसले के पीछे मौजूद लोग इससे पीछे नहीं हटते हैं तो केरलम में निश्चित रूप से मजबूत विरोध प्रदर्शन होंगे।’
खेल मंत्री ओजे जनीश (जो युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं) ने संवाददाताओं से कहा कि यदि कोई विश्वविद्यालय और उसका कुलपति इस तरह का फैसला एकतरफा लेते हैं तो इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि न तो सरकार और न ही युवा कांग्रेस ऐसे कदम का समर्थन करेगी।
भाषा शुभम नेत्रपाल
नेत्रपाल

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