ई20 पेट्रोल पर जनता में बढ़ रहा आक्रोश, जवाबदेही और पारदर्शिता की जरूरत: कांग्रेस

ई20 पेट्रोल पर जनता में बढ़ रहा आक्रोश, जवाबदेही और पारदर्शिता की जरूरत: कांग्रेस

ई20 पेट्रोल पर जनता में बढ़ रहा आक्रोश, जवाबदेही और पारदर्शिता की जरूरत: कांग्रेस
Modified Date: August 3, 2026 / 11:33 am IST
Published Date: August 3, 2026 11:33 am IST

नयी दिल्ली, तीन अगस्त (भाषा) कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि देशभर में ई20 पेट्रोल की बिक्री को लेकर लोगों में नाराज़गी बढ़ रही है और वे जवाबदेही तथा पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

मुख्य विपक्षी दल ने यह आरोप भी लगाया कि मोदी सरकार के मंत्री लोगों को यह भरोसा दिलाने में नाकाम रहे हैं कि ई20 पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित है, क्योंकि इसके समर्थन में कोई ठोस आंकड़े या रिपोर्ट उपलब्ध नहीं हैं।

ई20 पेट्रोल एक ऐसा ईंधन है जिसमें 20 प्रतिशत एथनॉल और 80 प्रतिशत सामान्य पेट्रोल मिला होता है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि 29 जुलाई को संसद में ई20 पेट्रोल के देशव्यापी क्रियान्वयन पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा दिए गए जवाब से समाधान की बजाय और अधिक सवाल खड़े हुए हैं।

उनके अनुसार, गडकरी का दावा है कि ई20 को वर्षों तक वैज्ञानिक परीक्षण के बाद लागू किया गया है और इससे वाहनों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचने का कोई प्रमाण नहीं है।

रमेश ने पर कहा, ‘‘लेकिन पिछले कई महीनों से देशभर के उपभोक्ता और मैकेनिक कम माइलेज, इंजन के प्रदर्शन में गिरावट, वाहनों पर ई20 के दीर्घकालिक प्रभाव को लेकर चिंता, इंजन की अनुकूलता, ठंडे मौसम में स्टार्ट होने में दिक्कत, 2023 से पहले बने वाहनों में तेजी से घिसावट, पुराने वाहनों में फ्यूल इंजेक्टर जाम होने, ईंधन पाइपों में जंग लगने तथा रबर के पुर्जों में दरार आने जैसी समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि आम उपभोक्ताओं के पास ई20 ईंधन के अलावा लगभग कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।

रमेश ने दावा किया कि 2023 से पहले बने 44,000 से अधिक पेट्रोल वाहनों के मालिकों पर जून 2026 में किए गए एक स्वतंत्र सर्वेक्षण में बड़ी संख्या में लोगों ने ई20 लागू होने के बाद प्रतिकूल प्रभाव महसूस होने की बात कही।

उन्होंने कहा, ‘‘सितंबर 2025 में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जैव ईंधन के कारण वाहन या इंजन को नुकसान पहुंचने संबंधी शिकायतों को बकवास बताया था।’’

पूर्व पर्यावरण मंत्री ने आरोप लगाया कि जुलाई, 2026 की ‘ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (एआरएआई) की रिपोर्ट के बावजूद मोदी सरकार ई20 से जुड़े दावों को लगातार खारिज कर रही है।

उन्होंने कहा कि टिकाऊपन संबंधी परीक्षणों में यात्री वाहनों के इंजनों में खराबी और विफलता के मामले भी सामने आए।

रमेश ने दस्तावेज़ का हवाला देते हुए दावा किया कि ई20 से ईंधन टैंक और अन्य आंतरिक धातु के पुर्जों में जंग लगने का खतरा बढ़ जाता है।

उन्होंने यह दावा भी किया कि ई20 के कारण पुराने चार पहिया वाहनों की ईंधन दक्षता में छह से सात प्रतिशत, पुराने दो पहिया वाहनों में तीन से चार प्रतिशत तथा ई20 अनुकूल चार पहिया वाहनों में भी एक से दो प्रतिशत तक की कमी आती है।

रमेश ने कहा, ‘‘जनता का आक्रोश बढ़ रहा है। लोग जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। वहीं, मोदी सरकार के मंत्री ई20 के पूरी तरह सुरक्षित होने का दावा लोगों को नहीं समझा पा रहे हैं, क्योंकि इसके समर्थन में कोई वास्तविक आंकड़े या रिपोर्ट मौजूद नहीं हैं।’’

भाषा हक रंजन शोभना

रंजन


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