नयी दिल्ली, 14 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर पुलिस थानों में ऐसे डिस्प्ले बोर्ड लगाने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया है, जिसमें झूठी शिकायतें, आरोप लगाने और मनगढ़ंत सबूत साझा करने पर मिलने वाली सजा की जानकारी दी गई हो।
याचिका में अदालत परिसरों और सार्वजनिक कार्यालयों में भी इसी प्रकार के डिस्प्ले बोर्ड लगाने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय का कहना है कि निर्दोष नागरिकों के खिलाफ झूठी शिकायतें दर्ज कराना, आरोप लगाना और मनगढ़ंत सबूत साझा करना जीवन, स्वतंत्रता और गरिमा के अधिकार तथा कानून के शासन के लिए एक गंभीर खतरा है।
शीर्ष अदालत में यह याचिका अधिवक्ता अश्विनी दुबे के जरिये दायर की गयी।
याचिका के मुताबिक, ‘‘भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस)-2023 के अध्याय 14 में इन समस्याओं से निपटने के लिए विशिष्ट प्रावधान हैं। लेकिन केंद्र और राज्यों ने इन्हें लागू करने के लिए उचित कदम नहीं उठाए हैं।’’
याचिका में यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि शिकायतकर्ता को झूठे मामले दर्ज करने और झूठी जानकारी देने के लिए मिलने वाली सजा के बारे में सूचित करने के लिए कदम उठाए जाएं।
याचिका में कहा गया, ‘‘ झूठी शिकायतों और निराधार मामलों को नियंत्रित करने के लिए, प्रतिवादियों को यह वचन/शपथ पत्र लेने का निर्देश दिया जाए कि शिकायत, बयान, साक्ष्य और आरोपों में किए गए कथन सत्य और सही हैं।’’
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