बरुण सखाजी श्रीवास्तव
संसद परिसर से एक वीडियो आया। इसमें खरगे अपने नेता इमरान मसूद से कह रहे हैं, हैदराबाद की तीन चीजें फैमस हैं, शेरवानी, बिरयानी और परेशानी। परेशानी को यूपी में मत घुसने देना। राजनेता हैं तो जाहिर है हर बात राजनीतिक होगी तो इसका इंटरप्रिटेशन भी राजनीतिक होगा। इस लिहाज से खरगे परेशानी के रूप में ओबेसी की पार्टी को दर्शा रहे हैं।
इस वीडियो में खरगे ने एक तरह से अपनी आगामी इलेक्शन स्ट्रेटजी रिवील की है। कांग्रेस अब हिंदू-मुसलमान खेमों में मुसलमान वाला खेमा अपने लिए ज्यादा महफूज मान रही है। खरगे की यह नीति यूपी के 5 करोड़ मुसलमानों को ध्यान में रखते हुए ठीक जान पड़ती है। लगभग 16 करोड़ मतदाताओं में साढ़े 3 करोड़ मतदाता 403 में से लगभग 150 सीटों पर ठीक-ठीक प्रभाव रखते हैं। करीब चार दशकों से यूपी से बाहर कांग्रेस बसपा की एबसेंस और सपा की कमजोर प्रजेंस के बीच अगर इन साढ़े 3 करोड़ वोटर तक सीधे पहुंच पाई तो उसे यूपी में 100 से ज्यादा सीटों तक पहुंचने से कोई रोक नहीं सकता।
भारत के मुसलमान भी 2014 से लेकर अब तक हुए 35 से ज्यादा चुनावों में समझ चुके हैं भाजपा को अगर कोई हरा सकता है तो वह कांग्रेस है। कांग्रेस अगर यूपी, बंगाल, महाराष्ट्र, केरल, बिहार जैसे राज्यों में सहयोगियों का लिहाज छोड़कर लड़ेगी तो यह उसके लिए अच्छा है। 2024 में 99 सीटों तक पहुंचने के पीछे बल्क में मिले मुस्लिम वोटर्स की भूमिका से कोई मना नहीं कर सकता। यह एक आजमाया हुआ तथ्य है। मुसलमान अब मान चुके हैं, कांग्रेस को मजबूत करना ही होगा। हिंदू अपनी धार्मिक पहचान पर न वोट देता था न देता है और न ही देगा।
चुनावी रणनीतियां बताती हैं, हिंदुओं की अपेक्षा मुसलमान वोटर्स का टर्नआउट लगभग 8 प्रतिशत ज्यादा होता है। यानि 100 हिंदुओं में से 65 और 100 मुसलमानों मे से 73 मुसलमान वोट करते हैं। यूपी में 65 सीटें सीधी मुस्लिम बाहुल्य हैं तो वहां तो किसी गैरमुस्लिम के जीतने का सवाल ही नहीं उठता। लगभग 85 सीटों पर मुस्लिम वोटर्स की संख्या 30 फीसद से ज्यादा है। ऐसी स्थिति में यहां हिंदू वोट 70 फीसद होकर भी सिर्फ 70 के 65 परसेंट ही पड़ेंगे जबकि मुस्लिम वोटर्स 30 के 73 परसेंट पड़ेंगे। उदाहरण के लिए मान लीजिए किसी सीट में 70 हिंदू और 30 मुसलमान हैं। हिंदू वोट 70 में 65 परसेंट यानि 52 हिंदू ही वोट डालेंगे। जबकि मुसलमानों में 30 में से 73 परसेंट के हिसाब से 22 वोट डालेंगे। संख्या के लिहाज से 52 वोट अधिक दिख रहे हैं, लेकिन ये 52 किस दल को जाएंगे यह तय नहीं है, लेकिन 22 एक दल को जा सकते हैं, यह तय है। अगर यह सीधे कांग्रेस को चले जाते हैं और 52 में से भी कुछ और मिल जाते हैं तो कांग्रेस एकदम से यूपी में कमाल कर देगी।
गणित के लिहाज से यह कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं है कि अब मुसलमान यूपी में कांग्रेस के साथ जा सकता है। तब कांग्रेस भाजपा से ज्यादा सपा के लिए खतरा बन सकती है। लेकिन क्या तात्कालिक फायदे और गांधी परिवार के पीछे भाग रही कांग्रेस ऐसे साहिसक और रणनीतिक कदम उठा भी सकती है?
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