चंडीगढ़, तीन अगस्त (भाषा) पंजाब विधानसभा ने सोमवार को भाजपा नीत केंद्र सरकार के खिलाफ कथित प्रश्नपत्र लीक और दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया।
प्रस्ताव पारित किए जाने के समय कांग्रेस और भाजपा के विधायक सदन में मौजूद नहीं थे।
पंजाब विधानसभा के पहले दिन वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने यह प्रस्ताव पेश किया।
उन्होंने प्रश्नपत्र लीक और परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दावा किया कि 2014 से भाजपा शासित राज्यों में प्रश्नपत्र लीक के कुल 93 मामले सामने आए है। उन्होंने कहा कि 2019 से 2024 के बीच ही प्रश्नपत्र लीक के 65 मामले सामने आए।
मान ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग की भी कड़ी निंदा की।
उन्होंने दावा किया कि छात्रों पर पैलेट गन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया।
इससे पहले चीमा ने दिल्ली समेत बिहार और महाराष्ट्र में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की।
उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पैलेट गन और आंसू गैस के गोले दागे गए।
मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि बिहार में एक प्रदर्शन के दौरान एके-47 राइफल का इस्तेमाल किया गया।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ मामले भी दर्ज किए गए।
शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान अपनी यात्रा का जिक्र करते हुए दावा किया कि उन्होंने पुलिस को प्रदर्शनकारी छात्रों पर “क्रूर” बल प्रयोग करते देखा।
उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर जुटे युवा देश के खिलाफ नहीं, बल्कि देश के लिए खड़े हुए थे।
बैंस ने भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि जो भी अपनी आवाज उठाता है, उसे देश विरोधी करार दिया जाता है।
उन्होंने सभी पक्षों की भागीदारी से शिक्षा आयोग के गठन पर जोर दिया।
अकाली दल वारिस पंजाब दे के नेता मनप्रीत सिंह अयाली ने आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा लाए गए इस निंदा प्रस्ताव का समर्थन किया।
सदन के सदस्यों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले युवाओं के प्रति एकजुटता भी जताई और उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने की मांग की।
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राखी प्रशांत
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