पंजाब: किसान संगठनों ने पराली जलाने पर कृषकों के खिलाफ कार्रवाई की निंदा की

पंजाब: किसान संगठनों ने पराली जलाने पर कृषकों के खिलाफ कार्रवाई की निंदा की

पंजाब: किसान संगठनों ने पराली जलाने पर कृषकों के खिलाफ कार्रवाई की निंदा की
Modified Date: September 30, 2025 / 07:10 pm IST
Published Date: September 30, 2025 7:10 pm IST

चंडीगढ़, 30 सितंबर (भाषा) पंजाब के किसान संगठनों ने पराली जलाने को लेकर धान कृषकों के खिलाफ की गई कार्रवाई की मंगलवार को निंदा की और फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए नकद प्रोत्साहन राशि की मांग की।

पराली जलाने पर प्रतिबंध के बावजूद कई किसान गेहूं की अगली फसल की बुवाई के लिए खेतों को साफ करने के मकसद से फसल के अवशेषों को जलाने का काम जारी रखे हुए हैं।

अक्टूबर एवं नवंबर में धान की फसल की कटाई के बाद दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने के लिए अक्सर पंजाब एवं हरियाणा में पराली जलाने को जिम्मेदार ठहराया जाता है।

चूंकि धान की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई के लिए समय बहुत कम होता है, इसलिए कुछ किसान पराली को जल्दी से साफ करने के लिए अपने खेतों में आग लगा देते हैं।

पंजाब में 15 से 29 सितंबर तक पराली जलाने की 95 घटनाएं हुईं।

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, 51 स्थानों पर पराली जलाने की जांच की गई।

अमृतसर में पराली जलाने के सबसे ज्यादा 55 मामले सामने आए। तरनतारन में 11, पटियाला में 10, मलेरकोटला में चार और बरनाला एवं कपूरथला में तीन-तीन मामले सामने आए।

पीपीसीबी के आंकड़ों के अनुसार, 48 मामलों में पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में 2.30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। कुल जुर्माने में से 1.80 लाख रुपये वसूल किए जा चुके हैं।

आंकड़ों से यह भी पता चला कि पराली जलाने की घटनाओं में कुल 51 प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं, जिनमें से 22 अमृतसर में और 11 तरनतारन में दर्ज की गई हैं।

ये मामले भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 के तहत दर्ज किए गए हैं, जो किसी लोक सेवक द्वारा विधिवत जारी आदेश की अवज्ञा से संबंधित है।

किसान मजदूर संघर्ष समिति के नेता सरवन सिंह पंधेर ने किसानों के खिलाफ कार्रवाई के लिए राज्य सरकार की आलोचना की।

उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है जबकि उन उद्योगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है, ‘जो पर्यावरण में सबसे अधिक प्रदूषण फैलाते हैं। ’

उन्होंने किसानों के खिलाफ प्राथमिकियां दर्ज करने, ‘रेड एंट्री’ और जुर्माना लगाने की कार्रवाई की कड़ी निंदा की।

पंधेर ने कहा कि कई छोटे किसान फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी खरीदने में असमर्थ हैं।

उन्होंने कहा कि किसान मजदूर संघर्ष समिति पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ कार्रवाई और बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए पर्याप्त मुआवजे की मांग को लेकर छह अक्टूबर को राज्य सरकार और केंद्र सरकार का पुतला फूंकेगी।

भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के महासचिव सुखदेव सिंह कोकिरकलां ने कहा कि सरकार को पराली प्रबंधन के लिए किसानों को प्रति एकड़ 2,500 रुपये देने चाहिए।

कोकिरकलां ने कहा कि किसान पराली नहीं जलाना चाहते हैं, वे मजबूरी में ऐसा करते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदूषण का सबसे पहले खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है।

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के नेता रमिंदर सिंह पटियाला ने भी कहा कि सरकार को पराली प्रबंधन के लिए किसानों को 200 रुपये प्रति क्विंटल देना चाहिए।

उन्होंने कहा, “सरकार को किसानों को सीआरएम मशीनें उपलब्ध करानी चाहिए। छोटे किसानों के लिए ये मशीनें खरीदना संभव नहीं है।”

पटियाला ने कहा, “हम किसानों के खिलाफ मामले दर्ज करने का कड़ा विरोध करते हैं।”

एसकेएम नेता ने किसानों पर कार्रवाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी।

भाषा जितेंद्र राजकुमार

राजकुमार


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