पंजाब पुलिस ने गुरु ग्रंथ साहिब की गुमशुदा प्रतियों के मामले में सीए को गिरफ्तार किया

पंजाब पुलिस ने गुरु ग्रंथ साहिब की गुमशुदा प्रतियों के मामले में सीए को गिरफ्तार किया

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  • Publish Date - January 1, 2026 / 10:57 PM IST,
    Updated On - January 1, 2026 / 10:57 PM IST

चंडीगढ़, एक जनवरी (भाषा) पंजाब पुलिस ने गुरु ग्रंथ साहिब की 328 गुमशुदा पवित्र प्रतियों के मामले में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के सीए के रूप में कार्यरत सतिंदर सिंह कोहली को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया गया।

अमृतसर में एसजीपीसी के पूर्व मुख्य सचिव और सीए समेत 16 लोगों के खिलाफ 2020 में प्रतियों के लापता होने के संबंध में सात दिसंबर 2025 को मामला दर्ज किए जाने के लगभग तीन सप्ताह बाद यह गिरफ्तारी की गई है।

अमृतसर में एसजीपीसी के प्रकाशन केंद्र से स्वरूपों के गायब होने का मामला जून 2020 में सामने आया, जिससे उस समय एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया था।

पिछले साल 29 दिसंबर को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा था कि लापता प्रतियों को खोजने के लिए सिख संगठनों द्वारा गहन जांच की मांग के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

कोहली की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए, आम आदमी पार्टी (आप) की पंजाब इकाई के मुख्य प्रवक्ता और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने बृहस्पतिवार को कहा कि पुलिस जांच एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर चुकी है और जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई की जा रही है।

धलीवाल ने कहा, ‘‘आज सिख संगत के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, जिसका वे पिछले चार से पांच वर्षों से इंतजार कर रहे थे।’’

‘आप’ के नेता बलतेज पन्नू ने कहा कि 328 पवित्र ‘स्वरूपों’ के गायब होने से संबंधित एक याचिका की सुनवाई के दौरान पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद जांच शुरू की गई थी।

इसी बीच, एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने इस मुद्दे पर ‘आप’ सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाया।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार दोहरी नीति अपना रही है और सिख भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है।

धामी ने एक बयान में कहा कि मान सरकार के कार्यकाल के दौरान धर्म के अपमान की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं, लेकिन इन गंभीर मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए एसजीपीसी के प्रशासनिक मामलों में ‘जानबूझकर हस्तक्षेप’ किया जा रहा है।

भाषा यासिर सुरेश

सुरेश