नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) कांग्रेस ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा 11वीं और 12वीं कक्षा की राजनीतिक शास्त्र की पाठ्यपुस्तक तैयार करने वाली पुनर्गठित टीम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े चार सदस्यों को शामिल किए जाने को लेकर बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि किताबों का “संघीकरण” किया जा रहा है।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के सभास्थल के ‘शुद्धिकरण’ का हवाला देते हुए यह भी कहा कि व्यक्तियों का शुद्धिकरण पाप है, किताबों का संघीकरण शाप है।”
उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में आरोप लगाया कि ‘नागपुर कोटरी फॉर एजुकेशनल रिराइटिंग एंड ट्रबल-मेकिंग’ (एनसीआरटी) की टोली द्वारा किताबों का पुनर्लेखन और संस्थाओं का ‘संघीकरण’ किया जा रहा है।
एनसीईआरटी ने कक्षा 11वीं और 12वीं की राजनीति शास्त्र की पाठ्यपुस्तकों के लिए पाठ्यपुस्तक तैयार करने वाली टीम का पुनर्गठन किया है। इसे सांस्कृतिक जड़ों, भारतीय ज्ञान परंपरा और समावेशिता को पाठ्यक्रम में शामिल करने का दायित्व सौंपा गया है। टीम में कम से कम चार सदस्य ऐसे हैं, जिनके आरएसएस से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध बताए जा रहे हैं।
टीम को कक्षा 11वीं की पाठ्यपुस्तक नवंबर तक और कक्षा 12वीं की पुस्तक अगले वर्ष जुलाई तक तैयार करने को कहा गया है।
इस मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में रमेश ने कहा कि राहुल गांधी ने कोटा में 17 जून को ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान भारतीय शिक्षा व्यवस्था की तीन बुराइयों ‘निजीकरण, केंद्रीकरण और ‘संघीकरण’ का उल्लेख किया था।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक लेख में कहा था कि शिक्षा व्यवस्था तीन ‘सी’-‘केंद्रीकरण, व्यावसायीकरण और सांप्रदायिकीकरण’ से प्रभावित है।
रमेश ने कहा, ‘‘एनसीईआरटी ने जो किया है, वह पिछले 12 वर्षों से हो रहा है, चाहे शिक्षा मंत्री के रूप में स्मृति ईरानी हों या प्रकाश जावड़ेकर, रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, धर्मेंद्र प्रधान व प्रह्लाद जोशी।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि इन सबका सूत्रधार आरएसएस है।
रमेश ने कहा, ‘‘एक तरफ वे व्यक्तियों का ‘शुद्धिकरण’ कर रहे हैं, जो पाप है और दूसरी तरफ पाठ्यपुस्तकों का ‘संघीकरण’ कर रहे हैं, जो शाप है।’’
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