प्रश्नपत्र लीक सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, ‘शॉर्टकट की संस्कृति’ का नतीजा : भाजपा नेता राजीव चंद्रशेखर

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प्रश्नपत्र लीक सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, ‘शॉर्टकट की संस्कृति’ का नतीजा : भाजपा नेता राजीव चंद्रशेखर

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  • Publish Date - July 25, 2026 / 01:26 PM IST,
    Updated On - July 25, 2026 / 01:26 PM IST

तिरुवनंतपुरम, 25 जुलाई (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केरल इकाई के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने शनिवार को कहा कि परीक्षा प्रश्नपत्र लीक केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं है, बल्कि यह ‘‘शॉर्टकट अपनाने की बढ़ती संस्कृति’’ का भी प्रतिबिंब है।

उन्होंने कथित नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर हो रहे प्रदर्शनों के दौरान इस्तेमाल की जा रही भाषा और लहजे पर भी आपत्ति जताई।

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब कथित नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं। छात्र संगठनों, नागरिक समाज समूहों और विभिन्न राजनीतिक दलों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है तथा नयी दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की आलोचना की है।

चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट किया, ‘‘परीक्षा प्रश्नपत्र लीक एक अपराध है। असली सवाल यह है कि ऐसे कौन-से कारण या कौन-से लोग हैं, जो इसे बढ़ावा देते हैं और इसकी संस्कृति को पोषित करते हैं। हमें इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि परीक्षा प्रश्नपत्र लीक का मुद्दा खुलकर चर्चा का विषय बना है। यह बहस जानकारीपूर्ण और शालीन तरीके से तब तक जारी रहनी चाहिए, जब तक इस पूरे तंत्र और उस संस्कृति को व्यापक रूप से समाप्त नहीं किया जाता, जो प्रश्नपत्र लीक को बढ़ावा देती है।’’

परीक्षा प्रश्नपत्र लीक को शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और बच्चों के भविष्य के लिए ‘‘स्पष्ट और गंभीर खतरा’’ बताते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि नए कानून बनने के बावजूद देश के विभिन्न राज्यों में ऐसी घटनाएं सामने आई हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘देखिए, प्रश्नपत्र लीक करने वाले और गिरफ्तार होने वाले कौन हैं। वही शिक्षक, जो प्रश्नपत्र तैयार करते हैं और वही परीक्षा अधिकारी, जिन पर परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है।’’

भाजपा नेता ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं है। इसके पीछे ‘‘बच्चों और अभिभावकों में शॉर्टकट अपनाने की प्रवृत्ति तथा कुछ कोचिंग संस्थानों का ऐसा तंत्र भी जिम्मेदार है, जो इस मानसिकता को बढ़ावा देता है और जल्दी सफलता का भरोसा दिलाता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे बच्चों को ऐसी शिक्षा व्यवस्था मिलनी चाहिए, जहां उनकी मेहनत और समर्पण ही उनकी सफलता तय करें, न कि शॉर्टकट या संदिग्ध कोचिंग नेटवर्क। अभिभावकों और शिक्षकों के रूप में हमें पहले इस बात पर सहमत होना होगा।’’

फेसबुक पर एक अलग पोस्ट में चंद्रशेखर ने छात्र आंदोलनों से जुड़े वायरल वीडियो की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उनमें छात्रों के अधिकारों की वास्तविक मांगों से अधिक अपमानजनक और घृणा फैलाने वाली भाषा का इस्तेमाल किया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह छात्रों के अधिकारों की लड़ाई नहीं है। इसका बड़ा हिस्सा केवल विरोध-प्रदर्शन की आड़ में गाली-गलौज और नफरत फैलाने का प्रयास है।’’

देश के निर्वाचित नेतृत्व के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा पर सवाल उठाते हुए चंद्रशेखर ने पूछा कि ऐसे अभियान के पीछे कौन लोग हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्वार्थी तत्व छात्रों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने छात्रों और उनके परिवारों से अपील की कि वे स्वार्थी तत्वों द्वारा तैयार की गई ‘‘अराजकता की दुकान’’ का हिस्सा न बनें।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरे बच्चे भी बड़े हो रहे हैं और मैं उनकी चुनौतियों को समझता हूं। हमारे बच्चों को सहयोग, अवसर और अपने सपनों का भारत बनाने का रास्ता चाहिए, न कि अराजकता और हिंसा की ओर ले जाने वाला रास्ता।’’

भाषा गोला सुभाष

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