पुख्ता परीक्षा व्यवस्था के लिए एनटीए में आमूल-चूल बदलाव जरूरी: अभाविप

पुख्ता परीक्षा व्यवस्था के लिए एनटीए में आमूल-चूल बदलाव जरूरी: अभाविप

पुख्ता परीक्षा व्यवस्था के लिए एनटीए में आमूल-चूल बदलाव जरूरी: अभाविप
Modified Date: September 24, 2026 / 05:23 pm IST
Published Date: September 24, 2026 5:23 pm IST

(कोमल शर्मा)

नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में आमूल-चूल परिवर्तन की मांग करते हुए कहा कि विभिन्न परीक्षाएं आयोजित कराने वाले इस निकाय को प्रश्नपत्र लीक को रोकने और जवाबदेही तय करने के लिए स्थायी कर्मचारियों तथा एक ‘पुख्ता’ परीक्षा व्यवस्था की सख्त जरूरत है।

अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि एनटीए को बाहरी एजेंसियों पर अपनी निर्भरता (आउटसोर्सिंग) को कम करने, प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया को मजबूत करने और पूरी परीक्षा प्रक्रिया के दौरान जवाबदेही तय करने जैसे कई सुधार करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, ‘एनटीए में आमूल-चूल परिवर्तन की जरूरत है। ऐसे कई सुधार हैं जिनकी एनटीए को दरकार है। एनटीए को स्थायी कर्मचारियों की जरूरत है। बहुत सारा कार्य बाहर से कराया जाता है। इसके अलावा, प्रश्नपत्र तैयार करने वालों की व्यवस्था को भी पुख्ता बनाना होगा।’

अभाविप नेता ने इस बात पर जोर दिया कि परीक्षा की घोषणा के दिन से लेकर उसके आयोजन और अंतिम परिणाम घोषित होने तक, पूरी प्रक्रिया को पुख्ता किया जाना चाहिए।

सोलंकी ने कहा, ‘‘एनटीए के भीतर इन प्रक्रियाओं के लिए स्थायी कर्मचारी होने चाहिए ताकि उनकी जवाबदेही तय रहे। इससे गड़बड़ी की आशंका काफी हद तक कम किया जा सकेगा।’’

उन्होंने कहा, ‘इसलिए मुझे लगता है कि एनटीए में सुधार बेहद जरूरी हैं। अगर इस संस्था का विस्तार करने की आवश्यकता है, तो वह भी किया जाना चाहिए।’

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) 2026 की परीक्षा रद्द होने और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (यूजीसी-नेट) में अनियमतिताएं सामने आने के बाद से एनटीए लगातार विवादों के घेरे में है।

सोलंकी ने यह भी कहा कि अभाविप चाहती है कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी साल में दो बार आयोजित की जाए और इसे कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) के माध्यम से कराया जाए। उन्होंने कहा कि इस तरीके से प्रश्नपत्र लीक का खतरा कम होगा और छात्रों को बेहतर प्रदर्शन करने का एक और मौका मिलेगा।

महामंत्री ने कहा, ‘इससे (गड़बड़ी या अनियमितताओं का) जोखिम निश्चित रूप से कम होगा और यह छात्रों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा।’

उन्होंने कहा, ‘छात्रों के पास दो विकल्प होंगे। कई बार मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र व्यक्तिगत कारणों से अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते, या फिर अच्छी तैयारी के बावजूद उनकी परीक्षा अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहती। अगर परीक्षा साल में दो बार आयोजित की जाती है, तो पहली बार में अच्छा प्रदर्शन न कर पाने पर भी उनके पास खुद को साबित करने का दूसरा मौका होगा।’

भाषा सुमित पवनेश

पवनेश


लेखक के बारे में