राजा रघुवंशी हत्याकांड : उच्चतम न्यायालय ने सोनम रघुवंशी के आचरण पर उठाए सवाल
राजा रघुवंशी हत्याकांड : उच्चतम न्यायालय ने सोनम रघुवंशी के आचरण पर उठाए सवाल
नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2025 में मेघालय में हनीमून के दौरान अपने पति की हत्या के मामले में आरोपी सोनम रघुवंशी के आचरण पर मंगलवार को सवाल उठाए और सुझाव दिया कि वह आत्मसमर्पण कर मुकदमे का सामना करे।
मध्यप्रदेश के इंदौर की रहनेवाली सोनम रघुवंशी को उसके कारोबारी पति राजा रघुवंशी की हत्या के सिलसिले में पिछले वर्ष जून में गिरफ्तार किया गया था।
दंपति 23 मई, 2025 को मेघालय के सोहरा क्षेत्र में घूमने के दौरान लापता हो गया था। बाद में दो जून, 2025 को राजा रघुवंशी का शव एक गहरी खाई से बरामद हुआ था।
पुलिस का आरोप है कि सोनम ने आर्थिक लाभ के उद्देश्य से भाड़े के हमलावरों के साथ मिलकर अपने पति की हत्या की साजिश रची।
न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ सोनम को दी गई जमानत को चुनौती देने वाली मेघालय सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
पीठ ने सोनम से सवाल किया, ‘‘आप अपने आचरण पर क्या स्पष्टीकरण देंगी? पुलिस का मामला यह है कि आप अपने पति के साथ उस स्थान पर गई थीं। घटना वहीं हुई, जहां उन पर हमला हुआ और उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद आपने क्या किया? यही मुख्य प्रश्न है। दूसरा, गिरफ्तारी के आधार को लेकर क्या आपने शुरुआती स्तर पर ही आपत्ति उठाई थी?’’
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह या तो मामले के गुण-दोष के आधार पर आदेश पारित करेगा या फिर सोनम को आत्मसमर्पण कर मुकदमे का सामना करने का निर्देश देगा।
न्यायमूर्ति सुंदरेश ने सोनम की ओर से पेश वकील से कहा, ‘‘हम यह इसलिए कह रहे हैं, ताकि आपको अचानक स्थिति का सामना न करना पड़े और साथ ही आप हमारे रुख को भी समझ सकें। आप निर्देश लेकर हमारे समक्ष वापस आइए।’’
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि विवाह के तुरंत बाद दंपति हनीमून मनाने मेघालय गया था।
सॉलिसिटर जनरल ने कहा, ‘‘ वह (सोनम) अपने पति को बहला-फुसलाकर पहाड़ियों के एक सुनसान स्थान पर ले गई। उसके प्रेमी के जरिए भाड़े पर रखे गए तीन लोग भी उसका पीछा कर रहे थे। अंततः पति की हत्या कर दी गई, पत्नी भी इसमें शामिल हुई और शव को खाई में फेंक दिया गया। उनकी मृत्यु खाई में फेंके जाने से नहीं हुई थी।’’
मेहता ने कहा, ‘‘पहले उनकी (राजा रघुवंशी) हत्या की गई और उसके बाद शव को खाई में फेंका गया। जांच में यही सामने आया है। इसके बाद आरोपी फरार हो गए। जांच में उन तीन लोगों का भी पता चला, जिन्होंने सोनम की मदद की थी और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। अब रिकॉर्ड पर यह भी है कि सोनम के प्रेमी ने उसे सलाह दी कि अब आत्मसमर्पण करना उसके लिए सुरक्षित रहेगा। उस समय वह गाजीपुर में थी और वहीं उसने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया।’’
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सोनम को अपनी गिरफ्तारी के कारणों की पूरी जानकारी थी।
सोनम की ओर से पेश वकील ने कहा कि इस मामले को मीडिया ने अत्यधिक प्रचारित किया है और यह परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित मामला है।
हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वह इस स्तर पर अभियोजन पक्ष के आरोपों की विस्तार से जांच करने का इच्छुक नहीं है। मामले की अगली सुनवाई अब बृहस्पतिवार को होगी।
नौ जुलाई को मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा था कि वह इस कानूनी प्रश्न को बड़ी पीठ के पास भेजने पर विचार कर सकती है कि क्या गिरफ्तारी ज्ञापन में किसी वैधानिक प्रावधान का गलत उल्लेख, विशेष रूप से टंकण संबंधी त्रुटि, गिरफ्तारी को अवैध ठहराने और आरोपी को जमानत देने के लिए पर्याप्त आधार हो सकता है।
उच्चतम न्यायालय ने यह भी संकेत दिया था कि वह इस बात की विस्तार से जांच करेगा कि क्या उच्च न्यायालय ने केवल गिरफ्तारी मेमो में टंकण संबंधी त्रुटि के आधार पर सोनम को जमानत देकर उचित निर्णय लिया था।
तीन जुलाई को शीर्ष अदालत की एक अन्य पीठ ने उच्च न्यायालय के जमानत आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
सॉलिसिटर जनरल ने नौ जुलाई को दलील दी थी कि गिरफ्तारी मेमो में किसी वैधानिक धारा का गलत उल्लेख, विशेषकर टंकण संबंधी त्रुटि जैसे आधार पर इस ‘‘चौंकाने वाले’’ हत्या के मामले में गिरफ्तारी को अवैध ठहराकर जमानत देना उचित नहीं हो सकता।
उच्च न्यायालय ने यह कहते हुए सोनम की जमानत बरकरार रखी थी कि पुलिस गिरफ्तारी के उचित लिखित आधार उपलब्ध कराने में विफल रही। अदालत ने कहा था कि गिरफ्तारी मेमो में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) (हत्या के लिए दंड) के स्थान पर धारा 403 का उल्लेख किया गया, जो इस संदर्भ में लागू ही नहीं होती। इससे ‘‘न्यायिक विवेक के पूर्ण अभाव’’ का पता चलता है।
सॉलिसिटर जनरल ने तर्क दिया था कि यह केवल एक लिपिकीय (क्लेरिकल) त्रुटि थी।
मेघालय उच्च न्यायालय ने 29 जून को निचली अदालत द्वारा सोनम को दी गई जमानत के आदेश को बरकरार रखा था।
उच्च न्यायालय ने 27 अप्रैल को निचली अदालत द्वारा दी गई जमानत को रद्द करने की मांग वाली राज्य सरकार की याचिका भी खारिज कर दी थी।
अदालत ने कहा था कि गिरफ्तारी के आधार तैयार करने का तरीका ‘न्यायिक विवेक के पूर्ण अभाव’ को दर्शाता है।
भाषा रवि कांत दिलीप
दिलीप

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