जयपुर, पांच अगस्त (भाषा) जयपुर के राजकीय आनंदीलाल पोद्दार मूक-बधिर उच्च माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों ने जर्जर भवन और बदहाल मूलभूत सुविधाओं के खिलाफ बुधवार को प्रदर्शन किया, जिसके बाद शिक्षा विभाग ने परिसर का निरीक्षण कर तत्काल प्रभाव से प्रधानाचार्य को हटा दिया।
विद्यार्थी विद्यालय भवन से बाहर निकलकर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन की सूचना मिलने पर राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली, कांग्रेस के मुख्य सचेतक रफीक खान और विधायक अमित चाचन धरनास्थल पहुंचे तथा विद्यार्थियों से मुलाकात की। उन्होंने विद्यालय के कर्मचारियों से भी उनकी समस्याओं के संबंध में चर्चा की। बाद में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी विद्यालय पहुंचकर विद्यार्थियों से मुलाकात की।
विद्यार्थियों ने सांकेतिक भाषा के माध्यम से आरोप लगाया कि विद्यालय में गंदे शौचालय, पेयजल की कमी और जर्जर भवन जैसी समस्याओं से उन्हें लंबे समय से जूझना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद विद्यालय प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की।
विरोध-प्रदर्शन के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने विद्यालय का निरीक्षण किया, जिसमें स्वच्छता, भवन रखरखाव और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में कई कमियां पाई गईं।
इसके बाद विभाग ने एक आदेश जारी कर प्रधानाचार्य भरत जोशी को तत्काल प्रभाव से उनके दायित्वों से मुक्त कर दिया और विद्यालय का प्रभार उपप्रधानाचार्य को सौंप दिया।
जोशी ने कहा, “सारे आरोप बेबुनियाद हैं। विद्यालय में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। वहां पीने के पानी की भी कोई कमी नहीं है।”
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने विद्यार्थियों के विरोध-प्रदर्शन को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की समस्याओं के प्रति असंवेदनशील है।
जूली ने कहा कि यह भाजपा सरकार के लिए “कलंक” है कि विद्यार्थियों को अपनी समस्याओं और अधिकारों के लिए एक बार फिर धरना देने के लिए मजबूर होना पड़ा।
उन्होंने आरोप लगाया कि विद्यार्थियों को जर्जर और असुरक्षित कक्षाओं में पढ़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
जूली ने कहा कि श्रवण बाधित बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की जगह अप्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति की गई है, जिससे उनका भविष्य खतरे में पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि जो बच्चे बोलकर अपनी बात नहीं रख सकते, उनकी खामोशी आज सरकार की असंवेदनशीलता के खिलाफ राजधानी की सड़कों पर गूंज रही है।
जूली ने कहा, “इन मासूम बच्चों को कक्षाओं में बैठाने के बजाय धरने पर बैठने के लिए मजबूर करना केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि अमानवीयता और क्रूरता की पराकाष्ठा है।”
उन्होंने कहा कि दिव्यांग बच्चों को उनके अधिकारों से वंचित करना और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
जूली ने कहा, “इस मुद्दे को आगामी विधानसभा सत्र में उठाया जाएगा।”
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का मौन प्रदर्शन उनकी गहरी पीड़ा को दर्शाता है।
जूली ने सरकार से विद्यार्थियों की समस्याओं का शीघ्र समाधान करने और उन्हें पर्याप्त आधारभूत सुविधाएं, प्रशिक्षित शिक्षक और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की मांग की।
बाद में विद्यालय पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए वह मुख्यमंत्री को पत्र लिखेंगे।
भाषा
बाकोलिया पारुल
पारुल