राजनाथ ने भारत, ऑस्ट्रेलिया के सैन्य हार्डवेयर का सह-विकास करने का समर्थन किया
राजनाथ ने भारत, ऑस्ट्रेलिया के सैन्य हार्डवेयर का सह-विकास करने का समर्थन किया
नयी दिल्ली, 10 अक्टूबर (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया अपने रक्षा संबंधों को नये सिरे से स्थापित करने तथा सुरक्षित एवं समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र की दिशा में काम करने के लिए एक ‘‘महत्वपूर्ण मोड़’’ पर खड़े हैं।
सिडनी में आयोजित गोलमेज सम्मेलन को संबोधित करते हुए सिंह ने आस्ट्रेलियाई व्यापार जगत के प्रमुख कारोबारियों को भारत के साथ मिलकर उन्नत प्लेटफॉर्म बनाने, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी विकसित करने तथा क्षेत्र में शांति एवं सुरक्षा को सुनिश्चित करने में भूमिका निभाने के लिए आमंत्रित किया।
रक्षा मंत्री ऑस्ट्रेलिया की दो दिवसीय यात्रा पर हैं।
उन्होंने कहा कि भारत प्रणोदन प्रौद्योगिकियों, स्वचालित ‘अंडरवाटर व्हीकल’ और उड़ान सिमुलेटर सहित उच्च-स्तरीय प्रणालियों के सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों का स्वागत करता है।
भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा उद्योग व्यापार गोलमेज सम्मेलन में उन्होंने कहा, ‘‘2020 में स्थापित हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत, हम अपने रक्षा संबंधों को न केवल साझेदारों के रूप में, बल्कि एक सुरक्षित और समृद्ध हिंद-प्रशांत के सह-निर्माताओं के रूप में पुनः स्थापित करने के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़े हैं।’’
सिंह ने रक्षा उपकरणों और सेवाओं के समझौते के पारस्परिक प्रावधान के लिए ऑस्ट्रेलिया के प्रस्ताव का भी स्वागत किया।
उन्होंने कहा, ‘‘हम इस पहल का स्वागत करते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि ऑस्ट्रेलिया ने भारत को एक शीर्ष स्तरीय साझेदार के रूप में मान्यता दी है और आसान प्रौद्योगिकी साझाकरण के लिए कुछ नियामक बाधाओं को दूर किया है। यह उस विश्वास और भरोसे का प्रमाण है जो हमें एक दूसरे से जोड़ता है।’’ रक्षा मंत्री ने दोनों देशों के लिए भविष्य में मौजूद अपार अवसरों पर भी जोर दिया।
रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘भारत में नौसैनिक जहाजों के सह-निर्माण, जहाज मरम्मत, रीफिटिंग और ऑस्ट्रेलियाई तथा सहयोगी देशों के जहाजों के लिए एमआरओ (रखरखाव, मरम्मत और संचालन) सहायता, स्वायत्त प्रणालियों और हरित जहाज निर्माण प्रौद्योगिकियों में संयुक्त अनुसंधान और विकास के अपार अवसर हैं।’’
उन्होंने कहा कि आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाकर, संयुक्त क्षमताओं का निर्माण करके और नवाचार में निवेश करके, दोनों देश एक लचीले, सुरक्षित और आत्मनिर्भर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में योगदान दे सकते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं ऑस्ट्रेलियाई व्यापार समुदाय को भारत में निवेश, सहयोग और नवाचार के लिए आमंत्रित करता हूं।’’
सिंह ने कहा, ‘‘हम साथ मिलकर अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी विकसित कर सकते हैं, उन्नत प्लेटफॉर्म बना सकते हैं और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि हमारे उद्योग न केवल आपूर्तिकर्ता हों, बल्कि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा के रणनीतिक प्रवर्तक भी बनें।’’
साझेदारी के संभावित क्षेत्रों को रेखांकित करते हुए, सिंह ने कहा कि भारत अपनी मजबूत जहाज निर्माण क्षमताओं, विविध विनिर्माण आधार और निजी क्षेत्र के नवप्रवर्तकों के लिए बेहतर परिवेश के साथ एक विश्वसनीय साझेदार बनने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय शिपयार्ड रॉयल ऑस्ट्रेलियाई नौसेना और ऑस्ट्रेलिया के प्रशांत समुद्री सुरक्षा कार्यक्रम के तहत आने वाले जहाजों को रीफिट और रखरखाव सेवाएं प्रदान कर सकते हैं।’’
भाषा सुभाष रंजन
रंजन

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