राजनाथ ने ‘वंदे मातरम्’ को पूर्ण रूप से गाए जाने का विरोध करने के लिए कांग्रेस पर निशाना साधा

राजनाथ ने ‘वंदे मातरम्’ को पूर्ण रूप से गाए जाने का विरोध करने के लिए कांग्रेस पर निशाना साधा

राजनाथ ने ‘वंदे मातरम्’ को पूर्ण रूप से गाए जाने का विरोध करने के लिए कांग्रेस पर निशाना साधा
Modified Date: August 21, 2026 / 05:15 pm IST
Published Date: August 21, 2026 5:15 pm IST

नयी दिल्ली, 21 अगस्त (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘वंदे मातरम्’ को पूर्ण रूप से गाए जाने का विरोध करने के लिए शुक्रवार को कांग्रेस की आलोचना की और इसे “असंवैधानिक” तथा “निंदनीय” करार दिया।

कांग्रेस ने बुधवार को कहा था कि वह ‘वंदे मातरम्’ को लेकर 1937 में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और उस समय के अन्य प्रमुख नेताओं द्वारा किए गए फैसले का पूरी तरह पालन करेगी तथा इसी के अनुरूप पार्टी कार्यकर्ता राष्ट्रगीत के सिर्फ दो अंतरे ही गाएंगे।

पार्टी की शीर्ष नीति निर्धारक इकाई कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में इसे लेकर चर्चा हुई थी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 1937 के सीडब्ल्यूसी के उस प्रस्ताव के कुछ अंश भी पढ़े थे और वंदे मातरम् के दो अंतरों के गायन का निर्णय लिया गया था।

सिंह ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘कांग्रेस द्वारा वंदे मातरम् का सम्मान करने से औपचारिक रूप से न केवल इनकार करना, बल्कि सीधे-सीधे विरोध करना, अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और संवैधानिक दृष्टि से बहुत गंभीर विषय है। भारत के संविधान के अनुसार, संसद देश की सर्वोच्च संस्था है और संसद से पारित कोई भी कानून हर व्यक्ति के लिए बाध्यकारी है।’’

उन्होंने पार्टी के इस फैसले को देश के भविष्य के लिए एक ‘‘गंभीर चेतावनी का संकेत” करार दिया और कहा कि इससे राजनीतिक रूप से “गंभीर संकट” पैदा हो सकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं मानता हूं कि कांग्रेस का यह निर्णय पूरी तरह असंवैधानिक और निंदनीय है। साथ ही राजनीतिक दृष्टि से भविष्य में एक गंभीर संकट को पैदा करने वाला है। वंदे मातरम् का विरोध करके कांग्रेस ने अपने नासमझी भरे खतरनाक इरादों को देश के सामने बता दिया है।’’

सिंह ने कहा, ‘‘यदि कोई इसे मानने से मना करता है, तो निश्चित रूप से संविधान के प्रति उनकी निष्ठा संदेह के घेरे में आ जाती है और यदि राष्ट्रगीत का सम्मान करने से कोई मना करता है, तो उसकी देशभक्ति पर भी सवालिया निशान लग जाता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस वंदे मातरम् पर 1937 के जिस प्रस्ताव की बात करती है, उसे कांग्रेस ने मुस्लिम लीग की कट्टरपंथी मांगों के आगे नतमस्तक होकर पारित किया था और इसका खामियाजा भविष्य में देश को विभाजन के रूप में देखना पड़ा।’’

रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘कट्टरपंथी तत्वों के साथ समझौता करना, हमेशा देश के लिए घातक साबित हुआ है।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस एक बार फिर ‘‘कट्टरपंथी तत्वों के आगे समर्पण कर रही है’’।

भाषा

देवेंद्र दिलीप

दिलीप


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