राज्यसभा में सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक पारित

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राज्यसभा में सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक पारित

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  • Publish Date - April 1, 2026 / 03:58 PM IST,
    Updated On - April 1, 2026 / 03:58 PM IST

नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) राज्यसभा ने बुधवार को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के अधिकारियों की सेवा शर्तों एवं पदोन्नति से जुड़े एक विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया तथा सरकार की ओर से भरोसा दिलाया गया कि यह कानून बनने के बाद इन बलों का बेहतर प्रबंधन होगा और कार्यकुशलता बढ़ेगी।

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि यह विधेयक इसलिए लाया गया है ताकि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में काडर का बेहतर प्रबंधन कर इसकी कार्यकुशलता को बढ़ाया जा सके।

मंत्री के जवाब के बाद उच्च सदन ने इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इससे पहले कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया।

गृह राज्य मंत्री ने कहा कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों का परिचालन कुशलता पूर्वक करने के लिए इस विधेयक में प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन बलों की कार्यप्रणाली एक सुस्पष्ट एवं व्यवस्थित कमांड एवं कंट्रोल ढांचे पर आधारित है, जो प्लाटून, कंपनी, बटालियन, सेक्टर, फ्रंटियर एवं उच्च कमान के विभिन्न स्तरों के माध्यम से संचालित होती है।

राय ने कहा कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के ढांचे की परिकल्पना प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभाई पटेल ने की थी और इसी के अनुरूप इनमें सेना एवं आईपीएस अधिकारियों को दायित्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि यह अनुभव किया गया कि भर्ती, पदोन्नति, वरिष्ठता एवं अन्य सेवा शर्तों के प्रबंधन के लिए एक स्पष्ट व्यापक ढांचा उपलब्ध कराया जाए, इसी उद्देश्य से यह विधेयक लाया गया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विधेयक के माध्यम से कहीं से भी वित्तीय लाभ बाधित नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के प्रावधानों से कैडर प्रबंधन को सुव्यवस्थित तरीके से बढ़ाया जा सकेगा।

मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के अधिकारियों की पदोन्नति, वरिष्ठता आदि के लिए नियम बना सकेगी। उन्होंने कहा कि यह विधेयक संघीय ढांचे के विरूद्ध नहीं है बल्कि यह उसे और मजबूत करता है।

उन्होंने कहा कि इन बलों में राज्य में विभिन्न अनुभव रखने वाले अधिकारियों की तैनाती से केंद्र एवं राज्यों के बीच मजबूत संबंध बनाने में मदद मिलती है।

विधेयक पर चर्चा के दौरान कई विपक्षी सदस्यों ने आईपीएस की तुलना में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के अधिकारियों को देर से पदोन्नति मिलने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि इस विधेयक के प्रावधानों से इस तरह के बलों के अधिकारियों की पदोन्नति में ठहराव आयेगा और उनके अवसर कम होंगे।

गृह राज्य मंत्री ने कहा कि ग्रुप ‘ए’ सामान्य ड्यूटी अधिकारियों की सेवा अवधि में उन्हें सामान्यत: चार पदोन्नति प्राप्त होती हैं। उन्होंने कहा कि सेवा में प्रवेश के समय आयु के आधार पर अनेक अधिकारियों को पांचवीं पदोन्नति प्राप्त करने का भी अवसर मिलता है।

उन्होंने कहा कि विभागीय पदोन्नति समितियों का नियमित आयोजन होता है और उसके माध्यम से समय समय पर पदोन्नति सुनिश्चित की जाती हैं। उन्होंने कहा कि न्यायालय में मामला विचाराधीन होने, वरिष्ठता को लेकर विवाद, सतर्कता स्वीकृति अथवा अनुशासनात्मक कार्रवाई के कारणों से पदोन्नति में विलंब होता है।

राय ने कहा कि पहले इन बलों में भर्ती प्रक्रिया में डेढ़ से दो साल लग जाते थे लेकिन अब यह समय घटकर 11 माह रह गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि देश की सीमाओं तथा अंदरूनी सुरक्षा करने वाले सशस्त्र बलों के कर्मियों के हाथों को पहले की कांग्रेस सरकारों ने बांध रखा था। उन्होंने कहा कि पहले इन कर्मियों को कई बार अनुमति नहीं मिलती थी और अवरोधों का सामना करना पड़ता था।

राय ने कहा कि केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने देश की सुरक्षा, अखंडता और संप्रभुता के लिए खतरा पैदा करने वालों पर आवश्यक कार्रवाई, मुंहतोड़ जवाब और सख्त से सख्त कदम उठाने का केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कर्मियों को अधिकार दिया है। उन्होंने कहा कि इससे हमारे सुरक्षा बलों के अधिकारियों एवं जवानों का हौसला बढ़ा है।

मंत्री के जवाब के बाद नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि इसे उच्चतम न्यायालय के निर्णय के खिलाफ लाया गया है। उन्होंने इसे प्रवर समिति को भेजने का सुझाव दिया। इसके बाद कांग्रेस सहित विपक्ष के सदस्य सदन से वाकआउट कर गये।

सदन के नेता जे पी नड्डा ने कहा कि विपक्ष को चर्चा से कोई लेनादेना नहीं है इसीलिए वे मंत्री के जवाब के बाद सदन से बहिर्गमन कर गए।

भाषा

माधव मनीषा

मनीषा