राज्यसभा चुनाव : हरियाणा कांग्रेस ने भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया

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राज्यसभा चुनाव : हरियाणा कांग्रेस ने भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया

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  • Publish Date - March 19, 2026 / 09:33 PM IST,
    Updated On - March 19, 2026 / 09:33 PM IST

चंडीगढ़, 19 मार्च (भाषा) कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने बृहस्पतिवार को हरियाणा के राज्यपाल असीम कुमार घोष से मुलाकात कर आरोप लगाया कि राज्य में हाल में हुए राज्यसभा चुनावों में सत्तारूढ़ भाजपा ने ‘‘राजनीतिक शिकारी’’ की तरह व्यवहार किया और विधायकों की खरीद-फरोख्त में खुलेआम लिप्त रही।

विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अगुवाई में कांग्रेस विधायकों के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात की।

कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि निर्वाचन अधिकारी आईएएस पंकज अग्रवाल की भूमिका पक्षपातपूर्ण थी।

अग्रवाल ने आरोपों का खंडन करते हुए बृहस्पतिवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को फोन पर बताया कि उन्होंने नियमों के अनुसार काम किया।

राज्यपाल को सौंपे गए कांग्रेस के ज्ञापन में कहा गया है, ‘‘सत्ताधारी दल ने ‘राजनीतिक शिकारी’ की तरह व्यवहार किया और निर्दलीय उम्मीदवार की जीत के लिए सभी अनैतिक साधनों का सहारा लिया।’’

इसमें आरोप लगाया गया कि सत्ताधारी भाजपा खुलेआम विधायकों की खरीद-फरोख्त, अनुचित सौदेबाजी, धमकियों, संस्थागत दबाव और सरकारी तंत्र के दुरुपयोग में लिप्त रही।

कांग्रेस विधायक दल ने राज्यपाल से, राज्य के संवैधानिक संरक्षक के रूप में, इस ‘‘अनैतिक और अलोकतांत्रिक आचरण’’ की जांच का आदेश देने का अनुरोध किया।

सोमवार को राज्यसभा की दो सीटों के लिए मतदान हुआ, जिसमें भाजपा के संजय भाटिया ने एक सीट जीती, जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार करमवीर सिंह बौद्ध ने निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के खिलाफ कड़े मुकाबले में दूसरी सीट हासिल की।

भाजपा की हरियाणा इकाई के उपाध्यक्ष नांदल ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था।

बौद्ध की मामूली अंतर से जीत ऐसे समय में हुई जब पांच कांग्रेस विधायकों पर ‘क्रॉस-वोटिंग’ के आरोप लगे।

इस बीच, पत्रकारों से बात करते हुए हुड्डा ने आरोप लगाया कि भाजपा ने नांदल की जीत सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया, जिसमें प्रलोभन देना, दबाव डालना और फूट डालना शामिल था।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक रघुवीर सिंह कादियान ने कहा कि सरकार का आचरण न केवल चुनाव के दौरान बल्कि विधानसभा के भीतर भी अत्यंत अलोकतांत्रिक रहा है।

भाषा शफीक माधव

माधव