राम कथा शाश्वत मूल्यों के प्रसार का जीवंत माध्यम: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

राम कथा शाश्वत मूल्यों के प्रसार का जीवंत माध्यम: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

राम कथा शाश्वत मूल्यों के प्रसार का जीवंत माध्यम: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन
Modified Date: January 17, 2026 / 08:29 pm IST
Published Date: January 17, 2026 8:29 pm IST

(फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, 17 जनवरी (भाषा) उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने शनिवार को राम कथा को नैतिकता, करुणा, बंधुत्व और मानवता के शाश्वत मूल्यों के प्रसार का एक जीवंत माध्यम बताया।

उन्होंने ये बातें मोरारी बापू द्वारा आयोजित नौ दिवसीय राम कथा के उद्घाटन पर कही। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने राम कथा को नैतिकता, करुणा, बंधुत्व और मानवता के शाश्वत मूल्यों के प्रसार का एक गहन और जीवंत माध्यम बताया, जो भारत की सभ्यतागत लोकाचार में गहराई से निहित हैं।

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उन्होंने कहा कि राम कथा केवल एक पवित्र महाकाव्य का वर्णन नहीं, बल्कि एक जीवंत दर्शन है, जो व्यक्तियों को गरिमा, अनुशासन, भक्ति और करुणा के साथ जीवन जीने का मार्गदर्शन करता है।

भगवान राम के जीवन और आदर्शों के बारे में उन्होंने कहा कि ये आदर्श धर्म के लिए मार्गदर्शक का काम करते हैं, जिसे उन्होंने जीवन जीने का सही तरीका बताया।

राधाकृष्णन ने नवंबर 2025 में अयोध्या के राम मंदिर में ऐतिहासिक ध्वजारोहण समारोह का जिक्र करते हुए कहा कि यह अवसर लाखों भक्तों की आस्था, धैर्य और सदियों पुरानी भक्ति की पुनः पुष्टि का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि चुनौतियां चाहे कितनी भी उत्पन्न हों, धर्म कभी नष्ट नहीं हो सकता और अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भगवान राम केवल मंदिरों में ही नहीं, बल्कि भारत की आत्मा में भी निवास करते हैं।

रामायण परंपरा की सार्वभौमिकता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भगवान राम का जीवन और आदर्श वाल्मीकि की संस्कृत रामायण और तुलसीदास की रामचरितमानस से लेकर कंबन की तमिल रामायणम और भारत और दुनिया भर में कई अन्य प्रस्तुतियों तक, भाषाओं और संस्कृतियों में व्यक्त किए जाते हैं।

इस कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी उपस्थित थे।

भाषा आशीष दिलीप

दिलीप


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