राज्यसभा में उठी रांची के सीआईपी मानसिक चिकित्सालय के विस्तार, अधिवक्ता सुरक्षा कानून बनाने की मांग

राज्यसभा में उठी रांची के सीआईपी मानसिक चिकित्सालय के विस्तार, अधिवक्ता सुरक्षा कानून बनाने की मांग

राज्यसभा में उठी रांची के सीआईपी मानसिक चिकित्सालय के विस्तार, अधिवक्ता सुरक्षा कानून बनाने की मांग
Modified Date: July 31, 2026 / 01:20 pm IST
Published Date: July 31, 2026 1:20 pm IST

नयी दिल्ली, 31 जुलाई (भाषा) राज्यसभा में सदस्यों ने शुक्रवार को उत्तराखंड में जनगणना, रांची के सीआईपी मानसिक चिकित्सालय के विस्तार, अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए कानून बनाने और संसदीय तथा विधानसभा चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण के मुद्दे उठाए तथा सरकार से इनके यथाशीघ्र समाधान की मांग की।

शून्यकाल में भाजपा के महेंद्र भट्ट ने उत्तराखंड में जनगणना का मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में जनगणना प्रक्रिया केवल जनगणना ही नहीं है बल्कि उत्तराखंड के भविष्य और उसकी पहचान और उसके समग्र विकास से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि 2027 की जनगणना देश की नीतियों, योजनाओं, तमाम संसाधनों का आधार बनाएगी इसलिए इसका खास महत्व है।

भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड में जनगणना को पारंपरिक तरीके से नहीं बल्कि ‘‘अपनी गणना अपना गांव’’ जैसे जनभागीदारी के अभियान के रूप में संचालित किया जाए। उन्होंने कहा कि गांवों से पलायन होने के कारण कई गांव खाली हो गए हैं। इसका असर जनांकिकी पर भी पड़ा है। ’’

उन्होंने दावा किया कि उत्तराखंड पर पलायन की गहरी मार पड़ी है। उन्होंने कहा कि सीमांत गांवों की सटीक गणना जरूरी है।

भाजपा सदस्य ने कहा कि उत्तराखंड केवल राज्य ही नहीं बल्कि महत्वपूर्ण सीमांत क्षेत्र है। उन्होंने मांग की कि राज्य का सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए ‘‘अपनी गणना अपना गांव’’ अभियान के तहत जनगणना कराई जानी चाहिए।

भाजपा के ही प्रदीप कुमार वर्मा ने रांची के सीआईपी मानसिक चिकित्सालय का मुद्दा उठाया और इसे राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि 1918 में स्थापित केंद्रीय मनश्चिकित्सा संस्थान (सीआईपी) में बड़ी संख्या में दूर दूर से मनोरोगी आते हैं और इनमें खासी संख्या गरीबों की होती है।

उन्होंने कहा कि इस संस्थान की अवसंरचना के विस्तार की और उसके नवीनीकरण की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस संस्थान की उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए इसे राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया जाना चाहिए।

भाजपा के ही मनन कुमार मिश्रा ने ‘‘अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम’’ का मुद्दा उठाया और कहा कि यह वकीलों की पुरानी मांग है।

उन्होंने कहा कि अदालतों में दलीलें देने वाले वकीलों की जान को भी खतरा होता है और कई अधिवक्ताओं की हत्या भी हुई है। उन्होंने अधिवक्ताओं की सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताते हुए उनके लिए ‘‘अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम’’ बनाने की मांग की।

भाजपा के रायगा कृष्णा ने संसदीय चुनावों एवं विधानसभा चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण की मांग की। उन्होंने कहा कि शिक्षा, नौकरी एवं स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी के लिए आरक्षण की व्यवस्था है लेकिन संसदीय चुनावों एवं एवं विधानसभा चुनावों में उनके लिए यह व्यवस्था नहीं है।

उन्होंने सरकार से इस ओर ध्यान देने की मांग की।

भाषा

मनीषा माधव

माधव


लेखक के बारे में