वाल्मीकि निगम घोटाले के जुड़ी किसी भी चर्चा का सामना करने को तैयार हूं : कर्नाटक के मंत्री नागेंद्र

वाल्मीकि निगम घोटाले के जुड़ी किसी भी चर्चा का सामना करने को तैयार हूं : कर्नाटक के मंत्री नागेंद्र

वाल्मीकि निगम घोटाले के जुड़ी किसी भी चर्चा का सामना करने को तैयार हूं : कर्नाटक के मंत्री नागेंद्र
Modified Date: August 19, 2026 / 02:45 pm IST
Published Date: August 19, 2026 2:45 pm IST

बेंगलुरु, 19 अगस्त (भाषा) राज्य मंत्रिमंडल में फिर से शामिल किए जाने को लेकर विपक्ष के निशाने पर आए कर्नाटक के मंत्री बी. नागेंद्र ने बुधवार को उनकी बर्खास्तगी की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रही भाजपा पर पलटवार किया। नागेंद्र ने कहा कि वह कथित वाल्मीकि निगम घोटाले को लेकर किसी भी चर्चा का सामना करने के लिए तैयार हैं, जिसके कारण उन्हें पहले इस्तीफा देना पड़ा था।

नागेंद्र ने जोर देकर कहा कि जांच में उनके खाते में घोटाले की धनराशि के अंतरण की पुष्टि नहीं हुई है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पिछले तीन दिनों से विधानसभा के दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित कर रही है। पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान हुए करीब 89 करोड़ रुपये के कथित कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम घोटाले के मामले में योजना एवं सांख्यिकी मंत्री नागेंद्र को हटाने की मांग कर रही है।

जून 2024 में निगम के लेखा अधीक्षक पी. चंद्रशेखरन की आत्महत्या के बाद यह अनियमितताएं सामने आईं थी। उस समय नागेंद्र आदिवासी कल्याण मंत्री थे। इन आरोपों के बीच उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें गिरफ्तार किया था। वह फिलहाल जमानत पर हैं।

नागेंद्र ने यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा,‘‘ विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मामले की जांच की, एक भी रुपया मेरे खाते में नहीं गया। मैंने यह बात खुले तौर पर कही है…।’’

उन्होंने कहा कि निगम के कोष से बिना बोर्ड की बैठक और उनकी जानकारी के 187 करोड़ रुपये अंतरित किए गए थे। इनमें से 100 करोड़ रुपये की राशि पर रोक लगा दी गई, जबकि शेष 87 करोड़ रुपये हैदराबाद के रास्ते करीब 800 बैंक खातों में भेजे गए।

नागेंद्र ने कहा कि एसआईटी ने धनराशि के अंतरण का पता लगाने के लिए चौबीसों घंटे काम किया और करीब 79 करोड़ रुपये बरामद किए गए। उन्होंने कहा कि शेष राशि भी बाद में बरामद कर ली गई। उन्होंने बताया कि मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने स्वेच्छा से इस्तीफा दिया था, क्योंकि उन्हें लगा था कि विभाग के मंत्री के पद पर बने रहने से जांच प्रभावित हो सकती है।

नागेंद्र को तीन अगस्त को डी. के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के मंत्रिमंडल के हालिया विस्तार में दोबारा शामिल किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा उन्हें निशाना बनाने के लिए इस मुद्दे का इस्तेमाल कर रही है, क्योंकि वह वंचित समुदाय से आते हैं और जमीनी स्तर से उठकर राजनीति में आगे बढ़े हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘एक आदिवासी समुदाय का व्यक्ति एक बार फिर मंत्री बना है। वे (भाजपा) मुझे पद से हटाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा मुद्दे पर चर्चा करने के बजाय विधानसभा की कार्यवाही बाधित कर रही है और कहा कि सरकार सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार है।

भाषा प्रचेता शोभना

शोभना


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