टीएमसी, शिवसेना (उबाठा) के बागी सांसदों के पास परिसीमन विधेयक का समर्थन करने का मौका है:मंत्री खडसे
टीएमसी, शिवसेना (उबाठा) के बागी सांसदों के पास परिसीमन विधेयक का समर्थन करने का मौका है:मंत्री खडसे
सूरत, 19 जून (भाषा) केंद्रीय मंत्री रक्षा खडसे ने शुक्रवार को कहा कि तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) के बागी सांसदों के पास अब संसद में परिसीमन विधेयक का समर्थन करने और यह सुनिश्चित करने का मौका है कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़े।
खडसे का यह बयान उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) के सामने आए राजनीतिक संकट के बीच आया है, क्योंकि पार्टी के नौ में से छह लोकसभा सदस्यों के महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सत्ताधारी शिवसेना में शामिल होने की संभावना है।
इसी तरह, तृणमूल के 20 बागी सांसदों के समूह ने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय कर लिया है।
इस साल अप्रैल में, भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को उस समय बड़ा झटका लगा, जब 2029 में लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करने वाला संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका।
लोकसभा में जहां 298 सदस्यों ने विधेयक के समर्थन में वोट किया, वहीं 230 सांसदों ने इसके विरोध में वोट दिया। विधेयक को पारित करने के वास्ते दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 वोटों की जरूरत थी।
युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री खडसे ने सूरत के दौरे के दौरान कहा कि जब सरकार ने पहले इस विधेयक को पारित कराने की कोशिश की थी, तो तृणमूल के सांसदों को लगा कि इसे लागू किया जाना चाहिए, लेकिन अपनी नेता के रुख के कारण वे इसका समर्थन नहीं कर सके।
खडसे ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हालांकि, अगर उन्हें (बागी सांसदों) अब मौका मिलता है और वे राजग के साथ मिलकर इस विधेयक का समर्थन करना चाहते हैं, तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। भले ही शिवसेना (उबाठा) में पार्टी के अंदरूनी मतभेद हों, लेकिन वे भी अब राजग में हमारे साथ शामिल होने को तैयार हैं। मुझे लगता है कि अगर देश की तरक्की के लिए कोई सांसद या विधायक राजग सरकार में शामिल होने के लिए आगे आता है, तो यह अच्छी बात है।’’
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सभी क्षेत्रों में महिलाओं को सशक्त बनाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण को साकार करने की हर संभव कोशिश की जा रही है और राजनीति में महिलाओं का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
भाषा शफीक माधव
माधव

Facebook


