यमुना में मलजल आने और उसके शोधन के बीच मौजूद अंतर को युद्धस्तर पर कम करें: एनजीटी

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यमुना में मलजल आने और उसके शोधन के बीच मौजूद अंतर को युद्धस्तर पर कम करें: एनजीटी

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  • Publish Date - February 17, 2023 / 07:36 PM IST,
    Updated On - February 17, 2023 / 07:36 PM IST

नयी दिल्ली, 17 फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कहा है कि हरियाणा में यमुना जलग्रहण क्षेत्र में मलजल आने और उसके शोधन में “भारी अंतर” को युद्धस्तर पर कम करने की आवश्यकता है।

एनजीटी ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश करने के बाद यमुना नदी की जल गुणवत्ता खराब हो गई है और यहां मलजल के प्रबंधन में मौजूदा अंतराल पर “विधिवत विचार करने और कम करने” करने की आवश्यकता है।

यह देखते हुए कि उत्तर प्रदेश राज्य ने यमुना प्रदूषण के संबंध में एक रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की, अधिकरण ने कहा कि यह “बहुत अफसोस” की बात है।

अधिकरण यमुना के “असंतुलित प्रदूषण” के लिए उपचारात्मक कार्रवाई से संबंधित मामलों और इस विषय पर पारित सर्वोच्च न्यायालय तथा न्यायाधिकरण के आदेशों के बावजूद “कानून राज, पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य की हानि” से निपटने में अधिकारियों की “विफलता” पर सुनवाई कर रहा था।

एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए.के. गोयल की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि हरियाणा राज्य द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में कहा गया है कि मलजल आने और इसके शोधन के बीच 240 मिलियन लीटर प्रति दिन (एमएलडी) का अंतर है।

पीठ ने कहा, “हमारा मानना है कि चार साल बाद वर्ष 2027 में लक्ष्यों को प्राप्त करने की प्रस्तावित योजना के बजाय मलजल उत्पन्न और इसके शोधन के बीच मौजूद भारी अंतर को युद्धस्तर पर दूर करने की आवश्यकता है। वरना अगले चार वर्षों तक पर्यावरण को लगातार नुकसान होता रहेगा।”

भाषा जोहेब पवनेश

पवनेश