राजीव गांधी फाउंडेशन को आरटीआई के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण घोषित करने की याचिका खारिज

राजीव गांधी फाउंडेशन को आरटीआई के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण घोषित करने की याचिका खारिज

राजीव गांधी फाउंडेशन को आरटीआई के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण घोषित करने की याचिका खारिज
Modified Date: August 17, 2026 / 06:59 pm IST
Published Date: August 17, 2026 6:59 pm IST

नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें राजीव गांधी फाउंडेशन को सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ घोषित करने की मांग की गई थी।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता ने 2011 की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि याचिकाकर्ता कई तारीखों पर पेश नहीं हुआ।

आरटीआई कानून के तहत, हर सार्वजनिक प्राधिकरण को अपने सभी रिकॉर्ड रखने होते हैं और अपने फैसलों को सही ठहराना और समझाना होता है। अगर किसी संगठन को सार्वजनिक प्राधिकरण घोषित किया जाता है, तो वह कानून के तहत पारदर्शिता और जानकारी देने की बाध्यताओं के दायरे में आ जाता है।

यह याचिका दिल्ली के वकील षणमुगा पात्रो ने दायर की थी। उन्होंने मुख्य सूचना आयोग (सीआईसी) के 15 अक्टूबर, 2010 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी गई थी कि फाउंडेशन सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं है।

उच्च न्यायालय ने पहले राजीव गांधी फाउंडेशन से अपने सालाना ऑडिट किए गए खातों को रिकॉर्ड पर रखने को कहा था, ताकि यह तय किया जा सके कि संगठन आरटीआई कानून के दायरे में आता है या नहीं।

भाषा वैभव सुरेश

सुरेश


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