नयी दिल्ली, पांच जुलाई (भाषा) सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (बीएआरसी) को निर्देश दिया है कि वह टेलीविजन रेटिंग नीति, 2026 के तहत पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी होने तक समाचार और गैर-समाचार, दोनों श्रेणियों की टेलीविजन रेटिंग जारी करना बंद कर दे। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
नए निर्देश में पूर्व में केवल समाचार चैनलों की रेटिंग पर लागू रोक का दायरा बढ़ाया गया है। इसके साथ ही भारत की टेलीविजन दर्शक मापन प्रणाली तब तक के लिए प्रभावी रूप से रोक दी गई है, जब तक कि बीएआरसी को मार्च में लागू हुई नयी नियामक व्यवस्था के तहत मंजूरी नहीं मिल जाती। इस नयी नीति ने टेलीविजन रेटिंग नीति, 2014 का स्थान लिया है।
इस संबंध में एक अधिकारी ने कहा, ‘‘सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) ने बीएआरसी को सभी श्रेणियों की टेलीविजन रेटिंग जारी करने पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। यह रोक तब तक नियामकीय व्यवस्था के तहत प्रभावी रहेगी, जब तक बीएआरसी नयी टेलीविजन रेटिंग नीति, 2026 के तहत अपना लाइसेंस पंजीकृत नहीं करा लेता।’’
भारत की एकमात्र टेलीविजन दर्शक मापन एजेंसी बीएआरसी हर सप्ताह दर्शकों की संख्या संबंधी आंकड़े जारी करती है। ये आंकड़े विज्ञापन, मीडिया योजना और कार्यक्रमों के मूल्यांकन के लिए उद्योग का मानक माने जाते हैं।
टेलीविजन रेटिंग नीति, 2026 के खंड 14.2 के अनुसार, कोई भी रेटिंग एजेंसी तब तक रेटिंग तैयार या जारी नहीं कर सकती, जब तक वह नयी नीति के सभी प्रावधानों का अनुपालन नहीं कर लेती।
नयी नीति के प्रमुख प्रावधानों में टीवी चालू करते ही सबसे पहले दिखाई देने वाले प्रारंभिक चैनल (लैंडिंग पेज) की दर्शक संख्या को टेलीविजन रेटिंग में शामिल नहीं करना है। अब इसका उपयोग केवल विपणन के उद्देश्य से किया जा सकेगा और प्रसारकों के लिए ऐसी व्यवस्था की जानकारी रेटिंग एजेंसियों को देना अनिवार्य होगा।
भाषा खारी नेत्रपाल
नेत्रपाल