कोट्टायम (केरल), दो जनवरी (भाषा) भारत के मलंकारा ऑर्थोडॉक्स सीरियन गिरजाघर के प्रमुख बेसलियस मार्थोमा मैथ्यूज तृतीय ने कहा कि धार्मिक कट्टरपंथियों को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी शासी अधिकारियों की है, साथ ही उन्होंने देश भर में ईसाइयों के खिलाफ हाल ही में हुए हमलों की निंदा की।
यहां करुकाचल के एक चर्च में बृहस्पतिवार को आयोजित एक कार्यक्रम में गिरजाघर के प्रमुख ने कहा कि बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों द्वारा धार्मिक अल्पसंख्यकों पर किए जाने वाले कथित तौर पर हमलों के खिलाफ जागरूकता फैलाने की तत्काल आवश्यकता है।
इन संगठनों को उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सहयोगी बताया।
ननों और पादरियों पर हमले तथा गिरजाघर के बाहर क्रिसमस समारोहों पर हुए हमलों के बाद, गिरजाघर के अंदर भी हमले होना तय है। हमें इनके अंदर की जाने वाली प्रार्थनाओं पर भी हमले के लिए तैयार रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सभी धर्म सत्य, न्याय और प्रेम के संदेश देते हैं, लेकिन हर धर्म में कट्टरपंथी भी होते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘किसी भी देश में शासन प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि वे ऐसे धार्मिक कट्टरपंथियों को नियंत्रित करें, चाहे फिर वे किसी भी समुदाय या धर्म से संबंधित हों।’’
मैथ्यूज ने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है।
गिरजाघर के प्रमुख ने भारत में ईसाई को विदेशी धर्म करार देने वाले नारों की तुलना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस नारे से की, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका सिर्फ अमेरिकियों के लिए है।
उन्होंने कहा, ‘‘जब लोग दावा करते हैं कि 80 प्रतिशत भारतीय हिंदू हैं और अन्य धर्मों को अस्तित्व में रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, तो इतिहास के जानकार ऐसे तर्कों की गलतफहमियों को अच्छी तरह से समझते हैं।’’
संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के राजनीतिक मोर्चों ने भी हमलों पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से कार्रवाई की मांग की।
इसी बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने शुक्रवार सुबह यहां ऑर्थोडॉक्स गिरजाघर के मुख्यालय में बेसलियस मार्थोमा मैथ्यूज तृतीय से मुलाकात की।
उनके साथ भाजपा नेता अनूप एंटनी और शॉन जॉर्ज भी थे।
भाषा यासिर माधव
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