नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने पिछले साल पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री दिवंगत बूटा सिंह के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी के मामले में पंजाब कांग्रेस प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और अन्य आरोपियों की पांच दिन के भीतर गिरफ्तारी की सोमवार को सिफारिश की।
आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाणा की अध्यक्षता में हुई सुनवाई में आरोपियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की वस्तु स्थिति रिपोर्ट पांच दिन के भीतर मांगी गई। आयोग ने जांच को ‘शीघ्र’ पूरा करने और बिना किसी ‘अनावश्यक देरी’ के सक्षम अदालत में आरोपपत्र दाखिल करने की भी सिफारिश की।
आयोग के अनुसार, यह सुनवाई कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग द्वारा तरनतारन में एक चुनाव प्रचार के दौरान बूटा सिंह के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी किए जाने से संबंधित थी।
वडिंग के खिलाफ पिछले साल नवंबर में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196 (धर्म, नस्ल आदि के आधार पर वैमनस्य को बढ़ावा देना) के तहत मामला दर्ज किया गया था। यह प्राथमिकी बूटा सिंह के बेटे सरबजोत सिंह सिद्धू की शिकायत पर कपूरथला जिले के साइबर अपराध थाने में दर्ज की गई थी।
सुनवाई के दौरान, पंजाब पुलिस के अधिकारी डीएसपी हरप्रीत सिंह और डीएसपी गुलजार सिंह (ईओ और साइबर अपराध) प्रतिवादी अधिकारियों की ओर से पेश हुए, जबकि याचिकाकर्ता सरबजोत सिंह भी मौजूद थे।
आयोग ने कहा कि पक्षकारों को सुनने और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री पर गौर करने के बाद उसने पिछली सुनवाई में की गई स्पष्ट सिफारिशों के बावजूद जांच, आरोपियों की गिरफ्तारी और कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) सौंपने में हुई देरी को लेकर ‘गंभीर चिंता’ जताई।
आयोग ने पांच मई को हुई पिछली सुनवाई में नियमों के अनुसार तय समय सीमा में जांच पूरी करने की सिफारिश की थी।
आयोग ने सरबजोत सिंह की उस शिकायत का भी संज्ञान लिया था, जिसमें उन्होंने कथित आरोपियों से धमकी भरे फोन आने की बात कही थी। इसके बाद आयोग ने उन्हें और उनके आश्रितों को एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 15ए के तहत जरूरी सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।
आयोग ने 30 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) भी मांगी थी। हालांकि, सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान उसने कहा कि उसके पहले दिए गए निर्देशों पर मांगी गई कार्रवाई रिपोर्ट अब तक प्राप्त नहीं हुई है।
आयोग ने कहा, ‘मामले में लगातार हो रही देरी को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने आज सिफारिश की कि संबंधित प्राधिकारी मामले में शामिल आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कानून के अनुसार तत्काल आवश्यक कदम उठाएं और ऐसी कार्रवाई की स्थिति से आयोग को पांच दिन के भीतर अवगत कराएं।’
आयोग ने यह भी सिफारिश की कि सक्षम प्राधिकारी जांच और गिरफ्तारी में हुई देरी के लिए जिम्मेदारी तय करे।
आयोग ने कहा, ‘‘यदि संबंधित जांच अधिकारियों की ओर से ‘जानबूझकर कर्तव्य की उपेक्षा’ पाई जाती है, तो कानून के अनुसार विभागीय कार्रवाई की जाए, जिसमें अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 4 के तहत कार्रवाई पर विचार भी शामिल है। आयोग ने कहा कि आयोग की सिफारिशों पर 30 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी गई है।
आयोग ने याचिकाकर्ता की सुरक्षा के मुद्दे को भी ‘विशेष गंभीरता’ से लिया और सरबजोत सिंह को कथित रूप से लगातार मिल रही धमकियों को देखते हुए अधिनियम की धारा 15ए के तहत दिल्ली और पंजाब दोनों जगह उन्हें तथा उनके आश्रितों को तत्काल और पर्याप्त पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने की सिफारिश की।
आयोग ने दोहराया कि पीड़ितों, शिकायतकर्ताओं, गवाहों और उनके आश्रितों की सुरक्षा एक ‘महत्वपूर्ण वैधानिक संरक्षण’ है और संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि याचिकाकर्ता बिना किसी ‘डर, दबाव या धमकी’ के मामले को आगे बढ़ा सकें।
सुनवाई की कार्यवाही के विवरण के अनुसार, वडिंग के खिलाफ शिकायत पंजाब भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा ने दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने दिवंगत बूटा सिंह के खिलाफ अनुचित और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे अनुसूचित जाति समुदाय की भावनाएं आहत हुईं।
सुनवाई के विवरण के अनुसार, यह पाया गया कि इस मामले का संज्ञान पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग पहले ही ले चुका था और विधानसभा उपचुनाव के दौरान शिकायत को तरनतारन के रिटर्निंग अधिकारी-सह-उप मंडल मजिस्ट्रेट को भेज दिया गया था। वडिंग को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया गया था।
वडिंग ने अपने जवाब में कहा था कि उनके भाषण को ‘जानबूझकर तोड़-मरोड़कर पेश किया गया।’ वडिंग ने कहा था कि उन्होंने ‘किसी जाति या व्यक्ति के खिलाफ कभी कोई अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया’ और संपादित भाषण को ‘पूरी तरह भ्रामक’ बताया था।
आयोग ने कहा कि पांच मई को हुई सुनवाई में जांच तय समयसीमा में पूरी करने और याचिकाकर्ता एवं उनके आश्रितों को आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराने की सिफारिश के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) प्राप्त नहीं हुई है।
सुनवाई के विवरण के अनुसार आयोग ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री पर गौर करने के बाद जांच में देरी, आरोपियों की गिरफ्तारी और कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) जमा करने में हुई देरी को लेकर ‘गंभीर चिंता’ जताई।
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा ने दिवंगत नेता बूटा सिंह के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी के मामले में उनकी गिरफ्तारी की एनसीएससी द्वारा सिफारिश किए जाने के कुछ घंटे बाद सोमवार को इसे ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ करार दिया और आरोप लगाया कि भाजपा उनकी पार्टी द्वारा उठाए गए ‘शुद्धीकरण’ मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
वडिंग पर आरोप है कि उन्होंने 11 नवंबर, 2025 को तरनतारन विधानसभा उपचुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार के प्रचार के दौरान बूटा सिंह के खिलाफ ‘जातिसूचक’ टिप्पणी की थी। बाद में उन्होंने बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा था कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे बूटा सिंह उनके लिए पिता समान थे और उनका कभी भी उनका अनादर करने का कोई इरादा नहीं था।
वडिंग ने सोमवार को यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि एनसीएससी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके ‘पांच दिन के भीतर गिरफ्तारी’ की बात कही है।
वडिंग ने दावा किया कि तरनतारन में उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा जिससे किसी की भावनाएं आहत हों और उन्होंने बूटा सिंह को पिता समान बताया।
वडिंग ने कहा कि वह एनसीएससी के अध्यक्ष से दो बार मिल चुके हैं। उन्होंने कहा, ‘अचानक एनसीएससी अध्यक्ष को 10 महीने बाद राजा वडिंग की गिरफ्तारी के लिए पत्र लिखने की याद आ गई। असल में भाजपा इस मुद्दे से ध्यान भटकाना चाहती है।’
एनसीएससी के बयान पर सवाल उठाते हुए वडिंग ने आरोप लगाया कि भाजपा इस महीने की शुरुआत में हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली स्थल पर हुए ‘शुद्धीकरण’ के मुद्दे से ध्यान हटाने का प्रयास कर रही है।
भाषा अमित माधव
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