आरक्षण संवैधानिक अधिकार, कोई ताकत इसे समाप्त नहीं कर सकती: चिराग पासवान

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आरक्षण संवैधानिक अधिकार, कोई ताकत इसे समाप्त नहीं कर सकती: चिराग पासवान

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  • Publish Date - August 24, 2026 / 04:51 PM IST,
    Updated On - August 24, 2026 / 04:51 PM IST

नयी दिल्ली, 24 अगस्त (भाषा) लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सोमवार को कहा कि जाति-आधारित आरक्षण को खत्म नहीं किया जा सकता क्योंकि यह एक संवैधानिक अधिकार है।

उन्होंने यह बात ऐसे समय कही जब विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सत्ताधारी पार्टी आरक्षण खत्म करने के लिए संविधान में संशोधन करना चाहती है।

पासवान ने यहां एक राष्ट्रीय सम्मेलन से इतर पत्रकारों से कहा, ‘‘ये लोग (विपक्ष) हर चीज में राजनीति देखते हैं। आखिर, क्या संघ, भाजपा और हमारी पार्टी सभी राजग का हिस्सा नहीं हैं? क्या आरक्षण कोई ऐसी चीज है जिसे सिर्फ इसलिए खत्म किया जा सकता है क्योंकि कोई ऐसा कहता है? यह एक संवैधानिक अधिकार है।’’

उन्होंने कहा कि आरक्षण ‘‘किसी को दी जाने वाली खैरात’’ नहीं है, बल्कि एक संवैधानिक अधिकार है जिसे ‘‘दुनिया की कोई भी ताकत कभी खत्म नहीं कर सकती’’। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि जो लोग ‘‘समीक्षा’’ या ‘‘सुधार’’ के नाम पर आरक्षण खत्म करने की बात करते हैं, ‘‘वे शायद यह भी नहीं समझते कि आरक्षण क्यों जरूरी है।’’

अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के साथ होने वाले व्यवहार का जिक्र करते हुए पासवान ने कहा कि समाज में जाति-आधारित भेदभाव जारी रहने के बावजूद लोग अब भी अक्सर यह सवाल उठाते हैं कि आरक्षण की जरूरत क्यों है।

उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से जुड़े हालिया विवाद का हवाला देते हुए सीधा सवाल किया कि क्या उनके मंच से जाने के बाद मंच को ‘‘शुद्ध’’ किया गया था।

पासवान ने उन घटनाओं की ओर भी इशारा किया जहां दलित दूल्हों को बारात निकालने से रोका जाता है, और जहां बड़े नेताओं के दौरे के बाद मंदिर परिसर को ‘‘गंगाजल’’ से धोया जाता है। उन्होंने कहा कि ये इस बात के सबूत हैं कि छुआछूत अब भी मौजूद है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह वही अनुसूचित जाति समुदाय है जो छुआछूत का शिकार था। संविधान में ‘अनुसूचित जातियों’ को इसी वजह से इस श्रेणी में रखा गया था क्योंकि वे छुआछूत का शिकार थे, उन्हें गांव से बाहर रहने के लिए मजबूर किया जाता था। उन्हें छूना तो दूर, उन्हें देखना भी पाप माना जाता था। क्या आज भी यह भेदभाव मौजूद नहीं है?’’

पासवान ने कहा कि ठीक इसी वजह से उन्होंने आरक्षण के भीतर ‘‘क्रीमी लेयर’’ की अवधारणा का विरोध किया। उन्होंने कहा, ‘‘आज, कम से कम हम एकजुट हैं और अपनी बात रख पा रहे हैं। लेकिन जिस पल उप-वर्गीकरण और ‘क्रीमी लेयर’ की चर्चा शुरू होगी, हमारी सामूहिक ताकत कम होने लगेगी। और जैसे-जैसे हमारी ताकत कम होगी, आरक्षण खत्म करने की चाहत रखने वालों को बढ़ावा मिलेगा।’’

उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजातियां वे समुदाय हैं जिनकी अपनी अलग वेशभूषा, जीवनशैली और बोलियां हैं और जिन्हें ‘‘अनुसूचित’’ का दर्जा दिया गया है, जबकि पिछड़े वर्ग वे लोग हैं जिनके पास अवसरों की कमी थी और जिन्हें आरक्षण व्यवस्था के ज़रिए मदद मिलती है।

उन्होंने यह भी बताया कि मोदी सरकार ने उच्च जातियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था शुरू की है।

पासवान ने कहा, ‘‘यह व्यवस्था बाबासाहेब (बी.आर. आंबेडकर) की सोच के आधार पर बनाई गई थी, और दुनिया की कोई भी ताकत इसे कमजोर नहीं कर पाएगी। जब तक मैं, रामविलास पासवान का बेटा, इस सरकार का हिस्सा हूं, मैं इस व्यवस्था के साथ कोई समझौता नहीं होने दूंगा।’’

भाषा वैभव अविनाश

अविनाश