जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली के लिए राज्य का दर्जा बहाल होना जरूरी: उमर अब्दुल्ला

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जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली के लिए राज्य का दर्जा बहाल होना जरूरी: उमर अब्दुल्ला

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  • Publish Date - July 21, 2026 / 08:35 PM IST,
    Updated On - July 21, 2026 / 08:35 PM IST

श्रीनगर, 21 जुलाई (भाषा) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि केंद्र शासित प्रदेश का राज्य का दर्जा बहाल किया जाना उसके विशेष दर्जे की अंतत: बहाली के लिए जरूरी है।

अब्दुल्ला ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के केंद्र के वादे की उसे लगातार याद दिलाता रहेगा। उन्होंने उम्मीद जतायी कि यह प्रतिबद्धता पूरी होगी।

उन्होंने यह भी दावा किया कि दिल्ली में उनका विरोध-प्रदर्शन पार्टी के अभियान की ‘सिर्फ शुरुआत’ है, अंत नहीं।

मुख्यमंत्री अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर सोमवार को दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पहुंचे थे। हालांकि कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रदर्शन के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती के कारण पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन स्थल की ओर जाने से रोक दिया था।

अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘कुछ लोग हमसे कहते हैं कि पहले अनुच्छेद 370 की बहाली और जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे की बात करें…मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि राज्य का दर्जा नहीं होगा तो अनुच्छेद 370 या 371 का क्या मतलब रह जाएगा?’’

उन्होंने कहा कि विशेष दर्जे की बहाली के लिए राज्य का दर्जा बहाल होना अनिवार्य है।

उन्होंने कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर को जो भी विशेष दर्जा मिले, चाहे वह अनुच्छेद 370 के तहत हो या किसी अन्य व्यवस्था के तहत, मूल सवाल केंद्र और जम्मू-कश्मीर के बीच शक्तियों के बंटवारे का है। केंद्र और किसी केंद्र शासित प्रदेश के बीच शक्तियों का बंटवारा नहीं हो सकता, क्योंकि किसी केंद्र शासित प्रदेश के पास अपने अधिकार नहीं होते। केंद्र शासित प्रदेश की सभी शक्तियां या तो केंद्र सरकार के पास होती हैं या फिर लोक भवन के पास। मंत्रिमंडल के सभी फैसले पहले उपराज्यपाल भवन भेजे जाते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगर ‘राज्य सूची’ ही नहीं होगी तो आप किस तरह की शक्तियों या अधिकारों के बंटवारे की बात कर रहे हैं? असल मुद्दा यही है। किसी भी विशेष दर्जे के तहत राज्य सूची, संघ सूची और समवर्ती सूची के कितने अधिकार मिलते हैं, बहस इसी बात को लेकर है।’’

अब्दुल्ला ने कहा कि विशेष दर्जे की बहाली के लिए राज्य का दर्जा ही महत्वपूर्ण आधार है।

उन्होंने कहा, ‘‘राज्य का दर्जा नहीं होगा तो राज्य सूची कहां से आएगी? सब कुछ संघ सूची के दायरे में होगा। इसलिए हम कहते हैं कि वहां तक पहुंचने के लिए पहले बुनियाद रखनी होगी, उसके बाद ही उसपर इमारत खड़ी की जा सकती है।’’

अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी पार्टी विशेष दर्जे के मुद्दे को भूली नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार गठन के बाद विधानसभा के पहले ही सत्र के पहले दिन हमने (विशेष दर्जे से संबंधित) प्रस्ताव पारित किया था। वह प्रस्ताव अब भी कायम है। उस प्रस्ताव पर चर्चा तभी हो सकती है, जब हमें राज्य का दर्जा वापस मिल जाएगा।’’

मुख्यमंत्री ने दलील दी कि राज्य दर्जे की मांग को अनुच्छेद 370 की बहाली के साथ जोड़ने से भाजपा-नीत केंद्र सरकार को राज्य का दर्जा बहाल करने में देरी करने का एक बहाना मिल गया।

उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा सरकार से अनुच्छेद 370 बहाल करने की उम्मीद करना मूर्खता होगी। इस सरकार से हमें जो मिल सकता है, वह विशेष दर्जे की बहाली के लिए बुनियाद तैयार करना है।’’

लद्दाख का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘लद्दाख को क्या मिला है? पहले वहां दो शक्तिशाली पर्वतीय परिषद थीं, अब सात हैं- हर जिले में एक।’’

उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय के समक्ष जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रतिबद्धता जताई थी।

दिल्ली में पार्टी के विरोध-प्रदर्शन को लेकर अब्दुल्ला ने कहा कि यह एक लगातार चलने वाले अभियान की शुरुआत है। उन्होंने कहा, ‘‘यह सिर्फ शुरुआत है, अंत नहीं। यह प्रक्रिया जारी रहेगी। इसका नया स्वरूप और रणनीति क्या होगी, इसका फैसला पार्टी स्तर पर फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व में किया जाएगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम बैठकर चर्चा करेंगे कि आगे क्या करना है, लेकिन यह प्रक्रिया इसी तरह जारी रहेगी। जम्मू-कश्मीर के भीतर कुछ कार्यक्रम होंगे और कुछ बाहर भी आयोजित किए जाएंगे।’’

उन्होंने बताया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने श्रीनगर और जम्मू में दो बड़े सम्मेलन आयोजित किए, जबकि सोमवार को पार्टी कार्यकर्ताओं ने जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी लड़ाई में कोई ढिलाई नहीं होगी। हम इस बात पर कायम हैं कि केंद्र को उसके वादे की याद दिलाते रहना है। हमें उम्मीद है कि अगर आज नहीं तो कल वह (केंद्र) अपना वादा पूरा करेगा और जम्मू-कश्मीर फिर से एक राज्य बनेगा।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि सोमवार के विरोध-प्रदर्शन की सबसे प्रभावशाली तस्वीर उनके पिता और नेशनल कान्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की थी, जिन्होंने 90 वर्ष की उम्र में भी मार्च का नेतृत्व किया।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरे और मेरे सहयोगियों के लिए कल के प्रदर्शन का सबसे बड़ा प्रतीक हमारे अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला थे। नब्बे वर्ष की उम्र में हाथ में छड़ी लेकर वह पैदल निकले और हमें अपने साथ हमारी गरिमा बहाल करने के लक्ष्य की ओर ले गए। इससे ज्यादा प्रभावशाली तस्वीर और कोई नहीं हो सकती।’’

उन्होंने प्रदर्शन में शामिल होने वाले पार्टी सहयोगियों का आभार भी जताया।

उन्होंने कहा, ‘‘वे अपने दम पर दिल्ली पहुंचे थे। पार्टी की ओर से कोई मदद नहीं की गई थी। हमने उनके लिए न तो उड़ानें बुक कीं, न ट्रेन और न ही वाहन। वे खुद गए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जो लोग हमारी कोशिशों को कमतर आंकते हैं और कहते हैं कि इतनी बड़ी पार्टी को लाखों लोगों को लाना चाहिए था, हम किसी को लेकर नहीं गए थे। वे सभी अपनी इच्छा से आए थे। मुझे उम्मीद है कि अगर हम फिर ऐसा कार्यक्रम आयोजित करेंगे तो मेरे सहयोगी उसमें भी शामिल होंगे।’’

प्रदर्शन में क्षेत्रीय दलों के शामिल नहीं होने पर निशाना साधते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि वे ‘‘भाजपा और केंद्र सरकार को नाराज नहीं करना चाहते थे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वे अपने घरों में बैठे रहे और केवल ट्वीट करते रहे। बाहर बारिश हो रही थी और वे रजाइयों में बैठकर सोशल मीडिया के जरिये अपना अभियान चला रहे थे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर के लोगों ने समझ लिया है कि उनके अधिकारों और सम्मान की बहाली के लिए कौन लड़ रहा है और कौन लोग अपने मोबाइल फोन के जरिये काम कर रहे हैं।’’

कश्मीर में आतंकवाद कम होने संबंधी अदालत की हालिया टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर अब्दुल्ला ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस भी मानती है कि हालात में सुधार हुआ है। अदालत की हालिया टिप्पणी एक कश्मीरी पंडित कर्मचारी की याचिका की सुनवाई के दौरान आई थी।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं उनसे (केंद्र से) लगातार पूछता हूं कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने का उचित समय क्या है। हम उस उचित समय तक कैसे पहुंचेंगे? एक तरफ आप कहते हैं कि आतंकवाद है और इसलिए राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया जा सकता, लेकिन दूसरी तरफ जब एक कश्मीरी पंडित कर्मचारी सुरक्षा कारणों का हवाला देकर कश्मीर से जम्मू तबादला मांगता है तो उच्च न्यायालय कहता है कि आतंकवाद नहीं है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ये दोनों बातें एक साथ नहीं चल सकतीं। हम भी मानते हैं कि स्थिति में सुधार हुआ है। अब अगर अदालत भी ऐसा ही मानती है और हम भी कहते हैं कि हालात इतने सुधर गए हैं कि आप हमें राज्य का दर्जा दे सकते हैं, तो फिर केंद्र सरकार क्यों कह रही है कि स्थिति खराब है।’’

दिल्ली के प्रदर्शन में विपक्षी दलों को आमंत्रित किए जाने के बारे में अब्दुल्ला ने कहा कि कांग्रेस पूरी मजबूती से नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ खड़ी रही, जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेताओं ने भी इसमें शामिल होने की कोशिश की।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें जंतर-मंतर पर इतनी अव्यवस्था की उम्मीद नहीं थी। हालात के कारण मैं कान्स्टिटूशन क्लब नहीं पहुंच सका। अन्य दलों के नेताओं ने पहुंचने की कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। हम अपने पार्टी अध्यक्ष से सलाह के बाद नया कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं।’’

भाषा अमित सुरेश

सुरेश