मणिपुर के पांच जिलों में इंटरनेट सेवाओं पर लगे प्रतिबंध को हटाया गया

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मणिपुर के पांच जिलों में इंटरनेट सेवाओं पर लगे प्रतिबंध को हटाया गया

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  • Publish Date - April 8, 2026 / 05:17 PM IST,
    Updated On - April 8, 2026 / 05:17 PM IST

इंफाल, आठ अप्रैल (भाषा) मणिपुर सरकार ने घाटी के पांच जिलों में ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवाओं पर लगी रोक को बुधवार को सशर्त हटा लिया, जबकि मोबाइल डेटा सेवाएं अब भी निलंबित रहेंगी। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।

गृह विभाग द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि यह निर्णय मौजूदा स्थिति की समीक्षा और नागरिकों को हुई परेशानियों को देखते हुए लिया गया है।

बयान के अनुसार, इंटरनेट पर प्रतिबंध के कारण महत्वपूर्ण कार्यालयों और उच्च न्यायालय में कामकाज तथा घर से काम करने जैसी गतिविधियों में व्यवधान आया।

इंटरनेट सेवाएं मंगलवार अपराह्न दो बजे से तीन दिनों के लिए अस्थायी रूप से निलंबित कर दी गई थीं।

बयान में कहा गया है कि सशर्त प्रतिबंध हटाने का निर्णय केवल पंजीकृत आईएसपी/टीएसपी (इंटरनेट सेवा प्रदाता/दूरसंचार सेवा प्रदाता) के माध्यम से ब्रॉडबैंड कनेक्शन (इंटरनेट लीज्ड लाइन और फाइबर टू द होम) पर लागू होगा।

बयान में कहा गया है कि उपयोगकर्ताओं को वाई-फाई या हॉटस्पॉट साझा करने पर प्रतिबंध सहित सभी नियमों व शर्तों का पालन करना होगा तथा वे अनुमति प्राप्त कनेक्शन के अलावा किसी अन्य कनेक्शन का उपयोग नहीं कर सकते हैं।

अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को बिष्णुपुर जिले में हुए एक बम हमले में दो बच्चों की मौत हो गई, जिससे हिंसा भड़क उठी।

बम हमले के विरोध में प्रदर्शन कर रही भीड़ ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) शिविर पर धावा बोल दिया, उस दौरान गोली लगने से दो अन्य लोगों मौत हो गई।

अधिकारियों ने बताया कि बम हमले के विरोध में लोगों के एक समूह ने दो तेल टैंकर और एक ट्रक में आग लगा दी, एक पुलिस चौकी में तोड़फोड़ की और प्रमुख सड़कों पर वाहनों की आवाजाही रोक दी।

अधिकारियों ने बताया कि हिंसा की आज सुबह कोई नयी घटना होने की सूचना नहीं है, लेकिन मंगलवार देर रात इंफाल पूर्वी और पश्चिमी जिलों के कुछ स्थानों पर सुरक्षा बलों तथा प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, जिसके चलते पुलिसकर्मियों को प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।

मई 2023 में मणिपुर में मेइती और कुकी-जो समूहों के बीच भड़की जातीय हिंसा में कम से कम 260 लोग मारे गए और हजारों लोग बेघर हुए हैं।

भाषा यासिर सुभाष

सुभाष