ऋषि अगथियार भारत की सांस्कृतिक एकता के प्रतीक हैं: उपराष्ट्रपति

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ऋषि अगथियार भारत की सांस्कृतिक एकता के प्रतीक हैं: उपराष्ट्रपति

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  • Publish Date - June 16, 2026 / 12:20 AM IST,
    Updated On - June 16, 2026 / 12:20 AM IST

नयी दिल्ली, 15 जून (भाषा) उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने सोमवार को कहा कि साधु-संत और ऋषि ही भारत की एकता के “असली शिल्पकार” थे। उन्होंने कहा कि केवल राजाओं या राजनीतिक संस्थाओं ने ही देश की एकता के लिए काम नहीं किया था।

उपराष्ट्रपति ने यह टिप्पणी यहां आयोजित एक समारोह में “अगथियार – द यूनिफायर” नामक पुस्तक के विमोचन के अवसर पर की।

उन्होंने अगथियार ऋषि को भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक बताते हुए कहा कि इस पूजनीय ऋषि ने उत्तर और दक्षिण भारत की परंपराओं को जोड़ा और हिमालय से लेकर हिंद महासागर तक फैले सभ्यतागत संबंधों को जीवंत किया।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने तमिल व्याकरण और तमिल संगम परंपरा में ऋषि अगथियार के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया और उन्हें उत्तर और दक्षिण भारत की संस्कृतियों के बीच एक सेतु बताया।

उन्होंने कहा कि भारत की एकता कोई आधुनिक अवधारणा नहीं, बल्कि हज़ारों वर्षों से पोषित एक प्राचीन सभ्यतागत वास्तविकता है।

भाषा प्रचेता प्रशांत

प्रशांत

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