इंडिगो की उड़ानें रद्द होने से प्रभावित यात्रियों को 164 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया : नायडू

Ads

इंडिगो की उड़ानें रद्द होने से प्रभावित यात्रियों को 164 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया : नायडू

  •  
  • Publish Date - March 16, 2026 / 05:36 PM IST,
    Updated On - March 16, 2026 / 05:36 PM IST

नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने सोमवार को राज्यसभा को बताया कि दिसंबर में विमानन कंपनी इंडिगो द्वारा बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द किए जाने से प्रभावित यात्रियों को यात्रा कूपन के रूप में 163.92 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया है।

नायडू ने उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए कई आवश्यक कदम उठा रही है कि इस तरह की घटना दोबारा न हो और न ही उपभोक्ताओं को परेशानी हो।

‘‘फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन’’ (एफडीटीएल) की समय सीमा समाप्त होने के बाद पायलटों की कमी के कारण दिसंबर में इंडिगो की सैकड़ों उड़ानें रद्द कर दी गईं।

इंडिगो संकट से संबंधित प्रश्न का उत्तर देते हुए मंत्री ने कहा कि मंत्रालय कई उपाय कर रहा है और यह सुनिश्चित कर रहा है कि इस तरह की स्थिति दोबारा न हो।

उन्होंने कहा, “मुआवजे के संदर्भ में, प्रभावित ग्राहकों की कुल संख्या करीब 3,64,000 थी। सत्यापन के बाद ग्राहकों को कुल मुआवजा वितरित किया गया है और अब भी कई यात्री हैं जिन्हें अपने टिकटों के अनुसार सत्यापन कराना बाकी है। इस राशि में से 43.81 करोड़ रुपये पहले ही वितरित किए जा चुके हैं।’’

नायडू ने कहा कि सद्भाव दिखाते हुए 10,000 रुपये के कूपन या यात्रा कूपन भी दिए गए हैं। इसके लिए, यात्रियों को 163.92 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं। इसके अलावा, यदि वे अपनी यात्रा का सत्यापन करा सकते हैं, तो उन्हें और भी कूपन दिए जाएंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘यह एक विशेष मामला था जहां नए एफडीटीएल नियम लागू हुए थे और विमानन कंपनी को अपने आंतरिक संचालन की समीक्षा करनी पड़ी और यह तय करना पड़ा कि अगर एफडीटीएल लागू हो रहा है, तो हमें कितने अतिरिक्त पायलटों की आवश्यकता है और हम कर्मियों की ड्यूटी कैसे तय करें ताकि संचालन पर कोई असर न पड़े।’’

उन्होंने कहा , ‘‘इंडिगो ने पिछले तीन महीनों में ही 246 से अधिक पायलटों की भर्ती की है… इस तरह की घटना दोबारा नहीं हो, इसके लिए कई आवश्यक उपाय किए गए हैं।’’

भाषा अविनाश माधव

माधव