आरएसएस की प्रार्थना नि:स्वार्थ कर्म और कर्तव्य के गीता के संदेश को दर्शाती है: कृष्ण गोपाल

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आरएसएस की प्रार्थना नि:स्वार्थ कर्म और कर्तव्य के गीता के संदेश को दर्शाती है: कृष्ण गोपाल

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  • Publish Date - August 3, 2026 / 09:27 PM IST,
    Updated On - August 3, 2026 / 09:27 PM IST

नयी दिल्ली, तीन अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पदाधिकारी कृष्ण गोपाल ने सोमवार को कहा कि संघ की प्रार्थना भगवद्गीता के मूल संदेश को दर्शाती है और स्वयंसेवकों को नि:स्वार्थ सेवा करने, धर्म का पालन करने और व्यक्तिगत लाभ की इच्छा किए बिना राष्ट्र के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देती है।

आरएसएस के स्थानीय मुख्यालय में ‘संघ प्रार्थना गीता के परिप्रेक्ष्य में’ पुस्तक के लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल ने कहा कि भगवद्गीता ने पहली बार कर्म करने और उसके फल के बारे में न सोचने का एक अलग दर्शन प्रस्तुत किया।

उन्होंने कहा, ‘‘भगवद्गीता इसलिए अनोखी है, क्योंकि शायद दुनिया में पहली बार उसने यह सिखाया कि मनुष्य को अपने कर्मों के फल की इच्छा नहीं करनी चाहिए। पहले के धर्मग्रंथों में आमतौर पर कहा गया था कि यदि आप कोई विशेष कर्म करेंगे तो उसका एक निश्चित फल मिलेगा, लेकिन गीता ने इससे अलग दर्शन प्रस्तुत किया।’’

कृष्ण गोपाल ने कहा, ‘‘गीता और संघ प्रार्थना, दोनों की अपनी एक पृष्ठभूमि है। यदि उस पृष्ठभूमि को समझा जाए, तभी दोनों की तुलना सार्थक बनती है।’’

आरएसएस पदाधिकारी ने कहा कि संघ की प्रार्थना स्वयंसेवकों को नि:स्वार्थ सेवा करने, धर्म का पालन करने और व्यक्तिगत लाभ की इच्छा किए बिना राष्ट्र के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देती है।

भाषा जोहेब सुरेश

सुरेश