दिल्ली में राशन की दुकानों के लिए नियम हुए सख्त, बड़ी गड़बड़ी होने पर मामला दर्ज करने का प्रावधान
दिल्ली में राशन की दुकानों के लिए नियम हुए सख्त, बड़ी गड़बड़ी होने पर मामला दर्ज करने का प्रावधान
नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) दिल्ली में राशन की दुकानों के लिए चार दशक पुराने आदेश की जगह नए नियम लागू हो गए हैं, जिनके तहत डीलरों को अब स्टॉक में गड़बड़ी के लिए स्पष्ट रूप से तय दंड का सामना करना पड़ेगा और बड़ी गड़बड़ी होने पर अनिवार्य रूप से प्राथमिकी दर्ज की जाएगी, साथ ही डीलर को काली सूची में भी डाला जा सकता है।
खाद्य, आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के विभाग ने 24 जुलाई को दिल्ली विशिष्ट वस्तु (वितरण का विनियमन) आदेश, 2026 अधिसूचित किया, जिसमें उचित दर की दुकान (एफपीएस) के डीलरों के लिए किलोग्राम के हिसाब से दंड की व्यवस्था की गई है।
यह बदलाव 1981 के नियमों से काफी अलग है, जिनमें डीलरों के खिलाफ कार्रवाई काफी हद तक अधिकारियों के विवेक पर निर्भर थी और स्टॉक में मिली कमी की मात्रा के आधार पर कोई निश्चित दंड नहीं था।
नए नियमों के तहत, 25 से 50 किलोग्राम तक भंडार में कमी होने पर डीलर की प्रदर्शन गारंटी से 2,000 रुपये जब्त किए जाएंगे और सात दिन में कमी पूरी की जाएगी।
इसके अलावा, 50 से 100 किलोग्राम तक की गड़बड़ी पर 10,000 रुपये जब्त किए जाएंगे और अंतरिम उपाय के तौर पर डीलर का लाइसेंस तुरंत निलंबित कर दिया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
नियमों के अनुसार, जहां स्टॉक में गड़बड़ी 100 किलोग्राम से अधिक होगी, वहां पूरी प्रदर्शन गारंटी जब्त कर ली जाएगी, लाइसेंस निलंबित किया जाएगा और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 7 या 10 के तहत अनिवार्य रूप से प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।
नए नियमों में अन्य कमियों के लिए भी कार्रवाई का प्रावधान है, जिनमें अनिवार्य जानकारी प्रदर्शित नहीं करना, ई-पीओएस मशीनों से छेड़छाड़, अग्नि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन, अस्वच्छ तरीके से सामान रखना और लाभार्थियों के साथ अभद्र व्यवहार शामिल हैं।
ऐसे उल्लंघनों पर 25,000 रुपये तक की राशि जब्त करने या लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई की जा सकती है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत आने वाले सामान को दूसरी जगह भेजने या उसकी हेराफेरी करने समेत बार-बार या जानबूझकर किए गए उल्लंघन को गंभीर माना जाएगा। ऐसा होने पर लाइसेंस रद्द किया जा सकता है, डीलर को काली सूची में डाला जा सकता है और प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है।
पहले के दिल्ली विशिष्ट वस्तु (वितरण विनियमन) आदेश, 1981 में स्टॉक में कमी के लिए निश्चित आर्थिक दंड का प्रावधान नहीं था। इसमें उपायुक्त को मामले के आधार पर डीलर का प्राधिकरण बदलने, निलंबित करने या रद्द करने और सिक्योरिटी डिपॉजिट की कुछ या पूरी राशि जब्त करने की अनुमति थी।
मौजूदा लाइसेंसधारकों को 5,000 रुपये का भुगतान करने और संशोधित पात्रता शर्तें पूरी करने के बाद नए एकमुश्त लाइसेंस हासिल करने के लिए 12 महीने का समय दिया गया है। इनमें जुलाई 2015 के बाद नियुक्त डीलरों के लिए कम से कम 12वीं कक्षा पास होना शामिल है।
नए आदेश में राशन की दुकानों को लाइसेंस देने और उनके चयन का तरीका भी बदला गया है।
नए नियमों के अनुसार, एफपीएस लाइसेंस अब दो प्रकार के होंगे नियमित लाइसेंस और अस्थायी लाइसेंस।
नियमित लाइसेंस के लिए समय-समय पर नवीनीकरण की जरूरत नहीं होगी और वे निलंबित या रद्द किए जाने तक वैध रहेंगे। अस्थायी लाइसेंस वितरण व्यवस्था में तत्काल जरूरत को पूरा करने के लिए अधिकतम तीन महीने तक वैध होंगे।
पात्रता का दायरा भी बढ़ाया गया है। अब व्यक्तियों के अलावा स्वयं सहायता समूह, सहकारी समितियां, गैर-सरकारी संगठन आदि भी एफपीएस लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकते हैं।
नए नियमों के तहत सभी एफपीएस दुकानों में विभाग द्वारा मंजूर ई-पीओएस मशीनों के साथ तौल मशीन और आइरिस स्कैनर का इस्तेमाल करना अनिवार्य होगा।
राशन की दुकानों पर सोमवार को साप्ताहिक अवकाश रहेगा और गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस तथा गांधी जयंती पर सार्वजनिक छुट्टी होगी।
भाषा जोहेब दिलीप
दिलीप

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