एस. जानकी: 20 भाषाओं में गानों से लोगों को किया मंत्रमुग्ध, 48,000 से अधिक गाने गाए
एस. जानकी: 20 भाषाओं में गानों से लोगों को किया मंत्रमुग्ध, 48,000 से अधिक गाने गाए
बेंगलुरु, 11 जुलाई (भाषा) दिग्गज पार्श्व गायिका एस. जानकी ने छह दशक से अधिक लंबे अपने शानदार करियर में 48,000 से अधिक गाने गाए और अपनी सुरीली आवाज के जरिए लोगों के दिलों में एक खास जगह बनाई।
आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के पल्लापटला में 23 अप्रैल 1938 को जन्मीं जानकी ने नौ साल की उम्र में पहली बार मंच पर प्रस्तुति दी थी।
उन्होंने 1957 में 19 वर्ष की उम्र में तमिल फिल्म ‘विधियिन विलायट्टु’ से पेशेवर पार्श्व गायन की शुरुआत की।
उसी वर्ष उन्होंने छह अलग-अलग भाषाओं में गीत रिकॉर्ड किए।
‘जानकी अम्मा’ के नाम से मशहूर एस. जानकी ने छह दशक से अधिक लंबे अपने संगीत करियर में करीब 20 भारतीय भाषाओं में गीत गाए। इनमें मलयालम, तेलुगु, तमिल, कन्नड़, हिंदी और बांग्ला भाषाएं शामिल हैं।
उन्होंने जापानी और जर्मन जैसी विदेशी भाषाओं के गीतों को भी अपनी आवाज दी।
दक्षिण भारत की ‘कोकिला’ के रूप में प्रसिद्ध जानकी ने अलग-अलग भाषाओं के कई दिग्गज संगीतकारों के साथ काम किया, जिनमें इलैयाराजा, एम. एस. विश्वनाथन, ए. आर. रहमान, के. वी. महादेवन और आर. डी. बर्मन जैसे संगीतकार शामिल हैं। इलैयाराजा के साथ उनकी साझेदारी विशेष रूप से सफल रही।
जानकी ने उनके संगीत निर्देशन में कई यादगार गीत गाए, जिनमें तमिल के ‘सेंथूरा पूवे’, ‘इंजी इडुप्पझगी’, ‘कात्रिल एंथन गीतम’ और ‘ओरु सनम’, कन्नड़ के ‘जोथेयाली’ और ‘आई लव यू (जीवा हूवागिदे)’ तथा मलयालम के ‘आयिरम कन्नुमायी’ जैसे लोकप्रिय गीत शामिल हैं।
कहा जाता है कि उन्होंने अपने करियर में सबसे अधिक गीत कन्नड़ भाषा में गाए।
पी. बी. श्रीनिवास, एस. पी. बालासुब्रह्मण्यम और डॉ. राजकुमार जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ उनके गाए गीत आज भी सदाबहार माने जाते हैं।
जानकी ने कन्नड़ फिल्म ‘हेमावती’ (1977) के गीत ‘शिव शिव एन्नदा नालिगेयके’ को अपने करियर का सबसे कठिन गीत बताया था।
इस गीत का संगीत एल. वैद्यनाथन ने दिया था।
कर्नाटक में उनके प्रशंसक उन्हें ‘गाना कोकिले’ (गाती कोयल) के नाम से पुकारते थे।
शानदार संगीत करियर के दौरान एस. जानकी को चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 33 राज्य फिल्म पुरस्कारों के अलावा कई अन्य सम्मानों से नवाजा गया।
कर्नाटक सरकार ने भी उन्हें ‘राज्योत्सव प्रशस्ति’ से सम्मानित किया था।
वर्ष 2013 में उन्होंने भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण को यह कहते हुए स्वीकार करने से इनकार कर दिया था कि इसके लिए उन्हें बहुत देर में चुना गया।
जानकी का मानना था कि भारतीय संगीत में उनके योगदान के लिए वह देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न की हकदार थीं।
वर्ष 1997 में पति वी. रामप्रसाद के निधन के बाद जानकी ने सादगी भरी और गरिमापूर्ण जीवनशैली अपना ली थी।
इसके बाद वह आमतौर पर सादी सफेद या बिना रंग की साड़ियों में नजर आती थीं, जो जीवनभर उनकी पहचान बन गई।
जानकी ने 2016 में 78 वर्ष की उम्र में पार्श्व गायन और मंचीय प्रस्तुतियों को अलविदा कह दिया। हालांकि, बाद में उन्होंने 2018 में तमिल फिल्म ‘पन्नाडी’ के लिए एक गीत रिकॉर्ड किया था।
जानकी ने भाषाई और क्षेत्रीय सीमाओं को पार कर लोगों के दिलों में जगह बनाई और भारत की सबसे सफल व सम्मानित पार्श्व गायिकाओं में से एक रहीं।
उनके गीत आज भी कई पीढ़ियों के बीच लोकप्रिय हैं।
जानकी को शनिवार दोपहर करीब 12 बजकर 49 मिनट पर मैसूरु के एक कॉरपोरेट अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था।
अस्पताल के अनुसार, जानकी ने शाम करीब सात बजकर 30 मिनट पर अंतिम सांस ली। वह 88 वर्ष की थीं।
भाषा जितेंद्र शोभना
शोभना
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