शबरिमला मामला: एसआईटी रिपोर्ट में पूर्व टीडीबी अध्यक्ष पर पारंपरिक प्रक्रिया की अनदेखी का आरोप

शबरिमला मामला: एसआईटी रिपोर्ट में पूर्व टीडीबी अध्यक्ष पर पारंपरिक प्रक्रिया की अनदेखी का आरोप

शबरिमला मामला: एसआईटी रिपोर्ट में पूर्व टीडीबी अध्यक्ष पर पारंपरिक प्रक्रिया की अनदेखी का आरोप
Modified Date: July 24, 2026 / 11:10 am IST
Published Date: July 24, 2026 11:10 am IST

कोल्लम (केरल), 24 जुलाई (भाषा) शबरिमला मंदिर में सोना गायब होने के मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने पाया है कि त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड (टीडीबी) के पूर्व अध्यक्ष पी.एस. प्रशांत और बोर्ड के पूर्व सदस्य ए. अजीकुमार ने तिरुवाभरणम (पवित्र आभूषण) आयुक्त की उस सिफारिश की अनदेखी की, जिसमें सोने की परत चढ़ाने के लिए पारंपरिक विधि अपनाने की सलाह दी गई थी।

रिपोर्ट में कहा गया कि इसके बजाय उन्होंने यह काम चेन्नई की कंपनी ‘स्मार्ट क्रिएशंस’ को सौंपने का फैसला किया।

बृहस्पतिवार को प्रशांत और अजीकुमार की गिरफ्तारी के बाद कोल्लम की सतर्कता अदालत में दाखिल रिमांड रिपोर्ट में एसआईटी ने यह जानकारी दी।

एसआईटी उन दो मामलों की जांच कर रही है जो शबरिमला मंदिर के ‘श्रीकोविल’ (गर्भगृह) के दरवाजों की चौखट और ‘द्वारपालक’ (रक्षक देवता) की मूर्तियों से कथित तौर पर सोना गायब होने से जुड़े हैं। ये चीजें 2019 में ‘इलेक्ट्रोप्लेटिंग’ (विद्युत धारा का उपयोग करके धातु की परत चढ़ाने का कार्य) की प्रक्रिया के लिए ले जाई गई थीं।

एसआईटी ने हाल में केरल उच्च न्यायालय को बताया कि वह 2025 में की गई ऐसी ही एक और ‘इलेक्ट्रोप्लेटिंग’ प्रक्रिया की भी जांच कर रही है जब प्रशांत टीडीबी के अध्यक्ष थे।

रिमांड रिपोर्ट के अनुसार, 17वें आरोपी प्रशांत, 18वें आरोपी अजीकुमार और बोर्ड के एक अन्य सदस्य जी. सुंदरेशन ने 2024 में शबरिमला मंदिर की द्वारपालक मूर्तियों की मरम्मत कराने के बोर्ड के निर्णय को मंजूरी दी थी।

हालांकि, मंडला-मकरविलक्कू तीर्थयात्रा का समय निकट होने के कारण उस वर्ष यह कार्य शुरू नहीं हो सका।

रिपोर्ट में कहा गया है कि तिरुवाभरणम आयुक्त रेजीलाल ने 24 जनवरी 2025 को पदभार संभालने के बाद तत्कालीन टीडीबी अध्यक्ष प्रशांत के निर्देश पर संबंधित अभिलेखों की जांच की।

एसआईटी के अनुसार, रेजीलाल ने पाया कि बोर्ड ने एक नवंबर 2024 को द्वारपालक मूर्तियों पर ‘इलेक्ट्रोप्लेटिंग’ करने का आदेश जारी किया था।

छह नवंबर 2024 को जारी एक अन्य आदेश के तहत तत्कालीन तिरुवाभरणम आयुक्त को स्वास्थ्य कारणों से इस प्रक्रिया से अलग कर दिया गया था और एक लिपिक तथा देस्वओम के स्वर्णकार को आगे की कार्रवाई का दायित्व सौंपा गया था, लेकिन इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई।

रिपोर्ट के अनुसार, रेजीलाल जानते थे कि ‘स्मार्ट क्रिएशंस’ के पास मूर्तियों पर पहले से चढ़ी सोने की परत को हटाकर उसका पुनः उपयोग करने की तकनीक नहीं है। इसलिए उन्होंने 30 जुलाई और आठ अगस्त 2025 को टीडीबी सचिव को रिपोर्ट सौंपकर पारंपरिक विधि अपनाने की सिफारिश की।

हालांकि, एसआईटी का आरोप है कि प्रशांत के निर्देश पर रेजीलाल ने बाद में 25 अगस्त 2025 को एक पत्र भेजा, जिसमें कहा गया कि मूर्तियों को सोने की परत चढ़ाने के लिए ‘स्मार्ट क्रिएशंस’ भेजा जा सकता है।

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि प्रशांत और अजीकुमार ने जानबूझकर अपने आधिकारिक दायित्वों का पालन नहीं किया।

एसआईटी, प्रशांत और अजीकुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ की अनुमति के लिए अदालत का रुख कर सकती है।

भाषा खारी सुरभि

सुरभि


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