कार्यस्थल पर सुरक्षा महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए अत्यंत आवश्यक: अन्नपूर्णा देवी

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कार्यस्थल पर सुरक्षा महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए अत्यंत आवश्यक: अन्नपूर्णा देवी

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  • Publish Date - July 17, 2026 / 05:48 PM IST,
    Updated On - July 17, 2026 / 05:48 PM IST

नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने सुरक्षित, सम्मानजनक और समावेशी कार्यस्थलों की आवश्यकता पर जोर देते हुए शुक्रवार को कहा कि कार्यस्थल पर सुरक्षा को मजबूत करना महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और समावेशी राष्ट्रीय विकास हासिल करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने यहां विज्ञान भवन में, कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (पॉश अधिनियम) पर दो दिन का राष्ट्रीय जागरूकता कार्यक्रम शुरू किया है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, मंत्री ने कहा कि महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास की दृष्टि को साकार करने के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और समावेशी कार्यस्थल सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा, ‘‘हर महिला को सम्मान और बिना किसी डर के काम करने का अधिकार है, और कार्य स्थल पर सुरक्षित माहौल बनाना सरकारों, नियोक्ताओं और संस्थानों की सामूहिक जिम्मेदारी है।’’

मंत्री ने कहा, ‘‘कामकाज में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और समावेशी राष्ट्रीय विकास हासिल करने के लिए कार्यस्थल पर सुरक्षा को मजबूत करना बहुत जरूरी है।’’

उन्होंने कहा कि कार्यस्थल के बदलते स्वरूप ने नयी चुनौतियां पैदा की हैं, जिनके लिए संस्थागत प्रतिक्रियाओं को लगातार मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने शिकायतों के समय पर निपटारे के साथ-साथ निष्पक्ष जांच प्रक्रिया, निजता की सुरक्षा और नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मंत्री ने ‘शी बॉक्स’ पोर्टल की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह पोर्टल शिकायतों के तय समय में समाधान के लिए एक अहम डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप उभरा है और महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक मजबूत संस्थागत वातावरण बनाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।

नियोक्ताओं और संस्थागत नेतृत्व से अधिक जवाबदेही की अपील करते हुए, मंत्री ने कहा कि हर संगठन को सम्मान, संवेदनशीलता और यौन उत्पीड़न को कतई बर्दाश्त नहीं करने पर आधारित कार्यस्थल संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए।

मंत्री ने पॉश अधिनियम के तहत आंतरिक समितियों और लोकल समितियों के लिए जांच प्रक्रियाओं पर एक पुस्तिका भी जारी की। इस पुस्तिका का मकसद अधिनियम के तहत निष्पक्ष, पारदर्शी और समय-सीमा के भीतर जांच करने के लिए एक व्यावहारिक दिशानिर्देश से अवगत कराना है।

आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा कि पॉश अधिनियम सिर्फ यौन उत्पीड़न को रोकने का कानून नहीं है, बल्कि महिलाओं की गरिमा की रक्षा करने, समान अवसर सुनिश्चित करने और सुरक्षित कार्यस्थल के उनके अधिकार की गारंटी देने वाला एक सशक्त माध्यम है।

उन्होंने कहा, ‘‘किसी भी महिला को अपनी आजीविका और अपनी सुरक्षा में से किसी एक को चुनने के लिए विवश नहीं होना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि इस कानून का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि संस्थानों में बनी आंतरिक समितियों और हर जिले में बनी स्थानीय समितियों के जरिए शिकायतों की निष्पक्ष और तय समय-सीमा के भीतर जांच हो।

रहाटकर ने कहा कि जागरूकता कार्यक्रम एक बड़ी कवायद का पहला कदम है। उन्होंने कहा कि शनिवार को होने वाले राष्ट्रीय परामर्श में, देश भर से मिली जानकारी के आधार पर इस अधिनियम को बेहतर ढंग से लागू करने के लिए सुझाव तैयार किए जाएंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘आज का दिन जागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित है, जबकि कल होने वाली चर्चा में अधिनियम के बेहतर कार्यान्वयन के लिए ठोस सिफारिशें तैयार करने के मकसद से देश भर से मिले सुझावों पर गौर किया जाएगा।’’

रहाटकर ने कहा कि पिछले तीन साल में राष्ट्रीय महिला आयोग ने ‘पॉश’ जागरूकता को एक राष्ट्रव्यापी अभियान के तौर पर आगे बढ़ाया है।

कार्यस्थल के बदलते स्वरूप का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल कार्यस्थल, हाइब्रिड कार्य और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) ने नयी चुनौतियां पैदा कर दी हैं, जिससे संस्थानों और लागू करने वालों के लिए लगातार सजग रहना जरूरी हो गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘सुरक्षित कार्यस्थल सिर्फ कानूनों से नहीं, बल्कि जागरूकता, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की साझा भावना से बनते हैं।’’

भाषा सुभाष वैभव

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