तुमकुरु (कर्नाटक), एक अप्रैल (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि शिवकुमार स्वामी जैसे संत समाज एवं राष्ट्र की आत्मा को आकार देते हैं तथा उनकी आध्यात्मिक विरासत उनके देहावसान के बाद भी देश का पोषण करती रहती है।
अपने अनुयायियों के बीच ‘त्रिविध दासोही’ (भोजन, आश्रय और शिक्षा) के लिए प्रसिद्ध शिवकुमार स्वामी सिद्धगंगा मठ के पीठाधीश्वर थे।
उनका 21 जनवरी 2019 को 111 वर्ष की आयु में निधन हो गया था।
राष्ट्रपति ने कहा कि परिश्रम, लोकसेवा और राष्ट्रसेवा परस्पर जुड़े हुए हैं तथा आध्यात्मिकता इन दोनों के लिए एक मजबूत और स्थायी आधार प्रदान करती है।
यहां श्री सिद्धगंगा मठ में संत की 119वीं जयंती और गुरुवंदना समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, “मेरा मानना है कि श्री शिवकुमार स्वामीजी जैसे संत हमारे समाज और राष्ट्र की आत्मा को आकार देते हैं। उनका भौतिक शरीर वर्ष 2019 में पंचतत्व में विलीन हो गया, लेकिन उनकी विरासत आज भी समाज और देश का पोषण कर रही है।”
मुर्मु ने कहा कि गरीबों और वंचितों की सेवा को समर्पित संत का जीवन कल्याणकारी गतिविधियों के माध्यम से आध्यात्मिकता की अभिव्यक्ति का एक अद्वितीय उदाहरण है।
राष्ट्रपति ने कहा, “उन्होंने अपनी आध्यात्मिक साधना के माध्यम से कई वर्षों तक मानवता को समृद्ध किया। गरीबों और वंचितों की सेवा को समर्पित उनका जीवन तथा कल्याणकारी कार्यों के जरिए आध्यात्मिकता की अभिव्यक्ति एक अनूठा उदाहरण है।”
मठ की गतिविधियों की सराहना करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, “कहा जाता है कि इस मठ के माध्यम से बड़ी संख्या में ग्रामीण बच्चों के लिए निःशुल्क भोजन, आवास और शिक्षा की व्यवस्था की जाती है, जो अत्यंत सराहनीय है।”
उन्होंने शिक्षा को विकास की कुंजी बताते हुए कहा कि वंचित और गरीब बच्चों को शिक्षा प्रदान करना देश का भविष्य निर्माण करना और राष्ट्र के विकास को आगे बढ़ाना है।
राष्ट्रपति ने कहा, “मुझे विशेष प्रसन्नता है यह जानकर हुई कि प्राथमिक विद्यालय से लेकर इंजीनियरिंग और प्रबंधन में उच्च शिक्षा तक की व्यवस्था इस मठ द्वारा की गई है। इस उद्देश्य के लिए अनेक शैक्षणिक संस्थान स्थापित किए गए हैं।’’
राष्ट्रपति ने संस्थान से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रयासों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “मुझे यह भी बताया गया है कि श्री सिद्धगंगा अस्पताल आम जनता को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है, जिसकी स्थापना शिवकुमार स्वामी ने की थी।”
उन्होंने यह भी कहा कि यह मठ सेवा और आध्यात्मिकता की एक दीर्घ परंपरा को आगे बढ़ा रहा है।
मुर्मू ने कर्नाटक की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रदेश लोकसेवा, राष्ट्रसेवा, आध्यात्मिकता और आधुनिक प्रगति के सबसे प्रभावी उदाहरणों में से एक को प्रस्तुत करता है।
उन्होंने राष्ट्र-निर्माण में योगदान के लिए राज्य के लोगों को बधाई दी।
भाषा रंजन नरेश
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