नयी दिल्ली, 10 जनवरी (भाषा) साकेत अदालत के कर्मचारियों ने कथित तौर पर अत्यधिक कार्य दबाव के कारण एक कर्मचारी की आत्महत्या के विरोध में प्रस्तावित हड़ताल को रद्द कर दिया है।
उन्होंने यह फैसला दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय के साथ बैठक के बाद लिया।
जिला एवं सत्र न्यायालय कर्मचारी कल्याण संघ (डीएससीईडब्ल्यूए) द्वारा जारी एक परिपत्र के अनुसार, दो घंटे की बैठक के दौरान, न्यायमूर्ति उपाध्याय ने प्रदर्शनकारियों की मांगों के संबंध में आवश्यक निर्देश पारित किए, जिनमें कार्यभार कम करने के लिए अधिक अदालती कर्मचारियों की भर्ती भी शामिल है।
पुलिस ने बताया कि न्यायाधीश नंदिनी गर्ग की ‘एनआई एक्ट डिजिटल अदालत’ के कक्ष नंबर 27 में तैनात अहल्मद (प्रशासनिक क्लर्क) हरीश सिंह महार ने शुक्रवार सुबह साकेत कोर्ट परिसर के ब्लॉक ए की उत्तरी विंग की पांचवीं मंजिल से छलांग लगा दी थी।
महार 60 प्रतिशत दिव्यांगता से पीड़ित थे। कर्मी ने एक सुसाइड नोट छोड़ा था जिसमें उन्होंने असहनीय कार्य दबाव और मानसिक पीड़ा को अपने इस चरम कदम के पीछे का कारण बताया।
इस घटना को लेकर अदालत परिसर के अंदर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। अदालत के कर्मचारी अपने कमरों से बाहर निकल आए और उन्होंने काम का बहिष्कार करने की घोषणा कर दी।
उन्होंने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गुरविंदर पाल सिंह से भी मुलाकात की और उनसे इस मामले में तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया। हालांकि न्यायाधीश ने उन्हें रिट याचिका दायर करने के लिए कहा।
इससे नाराज कर्मचारियों ने अपने सहकर्मी की मृत्यु के विरोध में शनिवार को होने वाली लोक अदालत की कार्यवाही का बहिष्कार करने की घोषणा की।
हालांकि, प्रदर्शनकारियों द्वारा न्यायमूर्ति उपाध्याय से मुलाकात के बाद शनिवार को हड़ताल समाप्त कर दी गई।
महार फरीदाबाद के निवासी थे और घर में उनके 94 वर्षीय पिता हैं। वह पिछले तीन महीनों से साकेत अदालत में काम कर रहे थे।
भाषा धीरज नेत्रपाल
नेत्रपाल