मरीज की अनुमति से समलैंगिक साथी आपात स्थिति में चिकित्सकीय फैसले ले सकते हैं: केंद्र
मरीज की अनुमति से समलैंगिक साथी आपात स्थिति में चिकित्सकीय फैसले ले सकते हैं: केंद्र
नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) केंद्र ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया है कि किसी वयस्क व्यक्ति के अक्षम होने की स्थिति में उसके निर्णय करने के अधिकार का सम्मान करते हुए उसकी तरफ से चिकित्सकीय फैसला करने हेतु उसके साथी को नामित करने की अनुमति दी जा सकती है।
सरकार ने यह दलील उस याचिका के जवाब में दी, जिसमें समलैंगिक जोड़ों को चिकित्सकीय इलाज के दौरान चिकित्सा प्रतिनिधि के रूप में मान्यता देने का अनुरोध किया गया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने अपने जवाबी हलफनामे में कहा है कि ऐसा दृष्टिकोण ‘‘मौजूदा कानूनी और नैतिक ढांचे के तहत काफी हद तक अपनाया जा सकता है’’, बशर्ते यह लागू कानूनों और उचित सुरक्षा उपायों के अनुरूप हो।
केंद्र के हलफनामे में कहा गया है, ‘‘किसी वयस्क व्यक्ति को अपनी असमर्थता की स्थिति में उसकी ओर से चिकित्सकीय फैसले लेने के लिए अपने साथी को नामित करने की अनुमति देना उसी सिद्धांत का तार्किक और उपयुक्त विस्तार होगा। इन साथियों में गैर-विषमलैंगिक/समलैंगिक संबंध में रहने वाले साथी भी शामिल हैं। यह मरीज के निर्णय लेने के अधिकार का सम्मान करने और इलाज की निरंतरता सुनिश्चित करने में सहायक होगा, बशर्ते उचित सुरक्षा उपायों और लागू कानूनों का पालन किया जाए।’’
याचिका पर बृहस्पतिवार को न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष सुनवाई होनी है। सुनवाई की पिछली तारीख पर उन्होंने केंद्र से एक साल बीत जाने के बाद भी याचिका पर जवाब नहीं देने को लेकर सवाल किया था।
केंद्र ने कहा कि वह ‘एलजीबीटीक्यूआईए प्लस’ समुदाय के सदस्यों समेत सभी व्यक्तियों की गरिमा, निजता, स्वायत्तता, समानता और व्यक्तिगत पसंद के संवैधानिक अधिकारों को मान्यता देता है और उनका सम्मान करता है।
‘एलजीबीटीक्यूआईए प्लस’ समुदाय उन लोगों का समूह है जो पारंपरिक लैंगिक पहचान और यौन रुझान से अलग पहचान रखते हैं।
इसने कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से दिशानिर्देश तैयार करने के लिए मांगी गई राहतों को मौजूदा कानूनी और नैतिक ढांचे के तहत काफी हद तक शामिल किया जा सकता है।
अदालत ने जुलाई 2025 में केंद्र और एनएमसी को नोटिस जारी किया था।
अदालत उस महिला की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो 2015 से अपने साथी के साथ संबंध में थी और दोनों ने 2023 में न्यूजीलैंड में शादी की थी। वे 2018 से दिल्ली में समलैंगिक जोड़े के रूप में साथ रह रही हैं।
याचिका में अदालत से दिशानिर्देश तैयार करने का अनुरोध किया गया है। याचिका में अस्पतालों या डॉक्टरों को गैर-विषमलैंगिक साथियों को चिकित्सा प्रतिनिधि के रूप में मान्यता देने और इलाज के दौरान उन्हें मरीज तक पहुंच की अनुमति देने का निर्देश दिये जाने का भी अनुरोध किया गया है।
भाषा
देवेंद्र नरेश
नरेश

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