सनातन धर्म लोगों को विभाजित करता है, इसे समाप्त किया जाना चाहिए : उदयनिधि
सनातन धर्म लोगों को विभाजित करता है, इसे समाप्त किया जाना चाहिए : उदयनिधि
चेन्नई, 12 मई (भाषा) द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेता उदयनिधि स्टालिन ने मंगलवार को दावा किया कि सनातन धर्म लोगों को विभाजित करता है और उन्होंने इसे ‘समाप्त’ करने का आह्वान किया।
उदयनिधि इससे पहले सितंबर 2023 में भी इस तरह का बयान दे चुके हैं।
तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में अपने पहले भाषण में द्रमुक नेता उदयनिधि स्टालिन ने यह भी कहा कि विपक्ष, तमिल प्रार्थना गीत ‘‘तमिल थाई वझुथु’’ को दरकिनार करने के किसी भी प्रयास को सफल नहीं होने देगा।
उन्होंने सदन में अपने भाषण में कहा, ‘‘सनातन धर्म लोगों को विभाजित करता है और उसे निश्चित रूप से समाप्त किया जाना चाहिए।’’
इससे पहले उदयनिधि ने 2023 में भी इसी तरह की टिप्पणी की थी, जिससे एक बड़ा विवाद पैदा हो गया था। उन्हें हिंदू समर्थक संगठनों की आलोचना का शिकार होना पड़ा था और उनके खिलाफ कई मामले भी दर्ज कराए गए थे।
उदयनिधि ने नयी सरकार के हालिया शपथ ग्रहण समारोह के संबंध में एक विशिष्ट शिकायत को उजागर करते हुए कहा कि राज्य के गीत को उसकी पारंपरिक प्राथमिकता के बजाय क्रम में तीसरे स्थान पर धकेल दिया गया।
विपक्ष के नेता उदयनिधि ने कहा, ‘‘…आपकी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान हुई ऐसी घटना एक गलती थी और आपको इस विधानसभा में इसे दोबारा होने नहीं देना चाहिए। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।’’
उन्होंने कहा कि न केवल विधानसभा में, बल्कि किसी भी सरकारी कार्यक्रम या तमिलनाडु में आयोजित किसी भी कार्यक्रम में, ‘तमिल थाई वझुथु’ को हमेशा प्रथम स्थान दिया जाना चाहिए।
विपक्ष के नेता ने कहा, ‘‘मैं इस सरकार से अनुरोध करता हूं कि यह सुनिश्चित किया जाए कि इस पर कभी समझौता न हो। हमें अपने अधिकारों और परंपराओं की रक्षा के लिए बहुत सतर्क रहना होगा।’’
उन्होंने दावा किया कि इस परंपरा से हटने से राज्य के लोगों में काफी आक्रोश है और उन्हें धक्का लगा है। उन्होंने सदन को 2023 की उस घटना की भी याद दिलाई, जब तत्कालीन द्रमुक सरकार ने राज्यपाल द्वारा प्रोटोकॉल में बदलाव करने के प्रयासों का विरोध किया था।
वर्तमान विधानसभा में विपक्ष की भूमिका को परिभाषित करते हुए, विपक्ष के नेता ने दिग्गज द्रविड़ नेता और द्रमुक के संस्थापक सी एन अन्नादुरई के ज्ञान का हवाला देते हुए विपक्ष को एक वाहन के ब्रेक या बैल की लगाम के समान बताया, जो सरकार को जनहित की ओर ले जाने के लिए आवश्यक है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विपक्ष में होने के बावजूद विपक्ष का इरादा विशुद्ध रूप से विरोधी शक्ति के बजाय एक रचनात्मक शक्ति के रूप में कार्य करने का है। उन्होंने कहा कि पिछले कार्यकालों के विपरीत, आज विपक्ष के सदस्यों की संख्या सत्तारूढ़ दल के सदस्यों के लगभग बराबर है।
उन्होंने बड़ी संख्या में पहली बार चुनकर आये विधायकों और महिला विधायकों की बढ़ती उपस्थिति का भी स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि वह स्वयं, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर सभी शहर स्थित लोयोला कॉलेज के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने हल्के फुल्के अंदाज में कहा कि राजनीतिक अनुभव के मामले में द्रमुक अब भी वरिष्ठ है।
द्रविड़ मॉडल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, उन्होंने कहा कि विपक्ष सरकार के प्रदर्शन पर नजर रखता रहेगा, ताकि ‘‘सब के लिए सब कुछ’’ के सिद्धांत को बरकरार रखा जाए।
उदयनिधि ने अध्यक्ष से निष्पक्षता बनाए रखने और सदन में विपक्ष की आवाज को जनता की सच्ची आवाज़ के रूप में सुनने का आग्रह किया।
इसी बीच, नवगठित तमिलनाडु विधानसभा के सत्र के दौरान सनातन धर्म को ‘समाप्त करने’ के आह्वान को दोहराने के बाद भाजपा ने द्रमुक नेता पर तीखा हमला किया।
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने दावा किया कि द्रमुक का हाल में सत्ता से बेदखल होना इसी तरह की विभाजनकारी बयानबाजी का सीधा परिणाम है।
तिरुपति ने ‘एक्स’ पर चेतावनी दी कि अगर द्रमुक धार्मिक भावनाओं का अपमान करना जारी रखती है, तो तमिलनाडु की जनता उसे ‘‘पूरी तरह से मिटा देगी।’’
तिरुपति ने लिखा, ‘यह समझें कि सनातन धर्म को मिटाने की बात करने के कारण ही आज जनता ने आपको और द्रमुक को सत्ता से दूर कर दिया है और बाहर फेंक दिया है।’’
यह विवाद 2026 के विधानसभा चुनाव में द्रमुक की हार के बाद हुआ है। विधानसभा चुनाव में जीत के बाद टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में आई है।
भाषा अमित दिलीप
दिलीप

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