‘सार्थक नाम अभियान’ विवादों में घिरा; सुझाव सूची में ‘भिक्षा’ और ‘भयंकर’ जैसे नामों पर सवाल

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‘सार्थक नाम अभियान’ विवादों में घिरा; सुझाव सूची में ‘भिक्षा’ और ‘भयंकर’ जैसे नामों पर सवाल

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  • Publish Date - April 16, 2026 / 10:37 PM IST,
    Updated On - April 16, 2026 / 10:37 PM IST

जयपुर, 16 अप्रैल (भाषा) राजस्थान में स्कूली बच्चों के अजीबोगरीब और अपमानजनक नामों को बदलकर सार्थक नाम देने की पहल के बीच शिक्षा विभाग की एक प्रारंभिक सूची विवादों में आ गई है जिसमें ‘भिक्षा’ और ‘भयंकर’ जैसे नामों के सुझाव सामने आने के बाद न केवल अभिभावकों बल्कि शिक्षाविदों ने भी इसकी गंभीरता और मंशा पर सवाल उठाए हैं।

इस पहल का उद्देश्य ‘शेरू’ या ‘शैतान’ जैसे नामों से होने वाली शर्मिंदगी और आत्मसम्मान पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को दूर करना है। हालांकि, तैयार की गई सूची में कुछ ऐसे नाम भी शामिल पाए गए हैं, जिन पर सवाल उठ रहे हैं।

शिक्षा विभाग द्वारा तैयार लगभग 3,000 नामों की सूची में 1,541 नाम लड़कियों और 1,409 नाम लड़कों के लिए सुझाए गए हैं, जिन्हें अभिभावकों के साथ साझा किया जाना है।

आलोचकों ने सूची में शामिल ‘भिक्षा’, ‘भयंकर’, ‘कलयुगी’, ‘मक्खी’, ‘उग्र’ और ‘ठाना’ जैसे नामों पर आपत्ति जताई है।

मामला तूल पकड़ने के बाद विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह केवल प्रारंभिक (ड्राफ्ट) सूची है।

एक अधिकारी ने कहा, ‘‘यह अंतिम सूची नहीं है। इसमें कई त्रुटियां पाई गई हैं और शिक्षा निदेशालय जल्द ही संशोधित सूची जारी करेगा।’’

राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर और समाजशास्त्री राजीव गुप्ता ने कहा कि इनमें से कई नाम आम प्रचलन में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के नाम रखने के पीछे आमतौर पर कोई न कोई सामाजिक या पारिवारिक संदर्भ होता है।

सामाजिक कार्यकर्ता यशवर्धन सिंह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कभी-कभी बच्चों को नकारात्मक अर्थ वाले नाम बुरी शक्तियों से बचाने के लिए दिए जाते थे, खासकर तब जब बच्चे का जन्म कई वर्षों बाद हुआ हो या पहले संतानों की मृत्यु हो चुकी हो। हालांकि, उन्होंने सूची में सुझाए गए नामों को अप्रासंगिक बताया।

अभिभावक संगठन ‘संयुक्त अभिभावक संघ’ ने भी इस पहल की आलोचना करते हुए इसे बढ़ती ड्रॉपआउट दर और शिक्षकों की कमी जैसे गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाने वाला कदम बताया।

सरकार ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य बच्चों में आत्मसम्मान और सामाजिक पहचान को मजबूत करना है।

अधिकारियों के अनुसार, पहल की नियमित निगरानी की जाएगी और सूची को संशोधित कर इसे गरिमा और सम्मान को बढ़ावा देने के अनुरूप बनाया जाएगा।

स्कूल शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने पहले कहा था कि बच्चों के नाम उनके व्यक्तित्व के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और कई बार ऐसे नाम बड़े होने पर शर्मिंदगी का कारण बनते हैं तथा आत्मसम्मान को प्रभावित करते हैं।

इस अभियान के तहत स्कूलों में ऐसे नामों की पहचान कर अभिभावक-शिक्षक बैठकों (पीटीएम) और स्कूल प्रबंधन समितियों के माध्यम से अभिभावकों को सकारात्मक विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

साथ ही, आधिकारिक अभिलेखों से जाति-आधारित या अपमानजनक संदर्भों को हटाने का भी लक्ष्य रखा गया है।

भाषा बाकोलिया

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