मध्यस्थता से विवादों का संतोषजनक समाधान संभव : न्यायमूर्ति नरसिम्हा

मध्यस्थता से विवादों का संतोषजनक समाधान संभव : न्यायमूर्ति नरसिम्हा

मध्यस्थता से विवादों का संतोषजनक समाधान संभव : न्यायमूर्ति नरसिम्हा
Modified Date: August 20, 2026 / 09:18 pm IST
Published Date: August 20, 2026 9:18 pm IST

नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा ने कहा है कि अदालत द्वारा थोपे गए फैसले की तुलना में मध्यस्थता के जरिये विवादों का समाधान अधिक टिकाऊ और संतोषजनक होता है। उन्होंने मध्यस्थता को न्यायिक व्यवस्था का स्थायी हिस्सा बनाने की जरूरत पर भी बल दिया।

आकाशवाणी के ‘न्यूज ऑन एयर’ को दिए एक साक्षात्कार में न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने उच्चतम न्यायालय की ‘समाधान समारोह’ पहल के बारे में कहा कि यह प्रक्रिया विवाद से जुड़े पक्षों को स्वयं अपने मामले का समाधान तय करने का अधिकार देती है, जबकि पारंपरिक न्यायिक प्रक्रिया में अंतिम फैसला न्यायाधीश करते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मध्यस्थता का लाभ यह है कि इसमें समाधान उन लोगों की स्वैच्छिक प्रक्रिया के माध्यम से निकलता है, जो उस विवाद से जुड़े होते हैं। यह अधिक टिकाऊ और अधिक संतोषजनक होता है।’’

उच्चतम न्यायालय की ‘समाधान समारोह’ पहल शीर्ष अदालत में लंबित मामलों के सौहार्दपूर्ण और आपसी सहमति से समाधान के लिए शुरू किया गया देशव्यापी मध्यस्थता अभियान है। यह पहल 21 अप्रैल को शुरू हुई थी और 21 से 23 अगस्त तक आयोजित होने वाली विशेष लोक अदालत के साथ इसका समापन होगा।

न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य दो प्रमुख चिंताओं का समाधान करना है। इनमें बड़ी संख्या में लंबित मामलों का निपटारा और अत्यधिक तकनीकी प्रक्रियाओं के बिना विवादों को सुलझाने का आसान तरीका उपलब्ध कराना शामिल है।

उन्होंने कहा कि मध्यस्थता के जरिए हुए समझौतों को ‘कानूनी मान्यता’ प्राप्त होती है और वे अदालत के आदेश के समान होते हैं, जिन्हें लागू कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि समझौते का पालन करने से इनकार करने वाले पक्ष के खिलाफ निष्पादन की कार्यवाही शुरू की जा सकती है।

न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने यह भी कहा कि फिलहाल इस प्रक्रिया के लिए पक्षकारों को कोई अतिरिक्त खर्च नहीं उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि मामला दायर करते समय जमा की गई अदालत फीस और स्टांप शुल्क, मध्यस्थता के जरिए मामले का निपटारा होने पर वापस कर दिए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि ‘समाधान समारोह’ कोई अलग कानूनी व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह मध्यस्थता अधिनियम, 2023 के तहत मध्यस्थता प्रक्रिया के साथ मौजूदा लोक अदालत प्रणाली के इस्तेमाल का एक तरीका है।

न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने इस पहल को संस्थागत रूप देने की जरूरत बताई।

उन्होंने कहा, ‘‘इसे संस्थागत बनाने की आवश्यकता है। यह हर दो या तीन साल में एक बार होने वाली पहल नहीं हो सकती। हमें इसे एक स्थायी व्यवस्था के रूप में स्थापित करना होगा।’’

उन्होंने पेशेवर रूप से प्रशिक्षित मध्यस्थों की कमी का भी उल्लेख किया और कहा कि उच्चतम न्यायालय में एक स्थायी संस्थागत विभाग की आवश्यकता है।

उन्होंने बताया कि भूमि अधिग्रहण, वैवाहिक विवाद, संपत्ति विवाद, वाणिज्यिक मामले, मोटर दुर्घटना मुआवजा और चेक बाउंस जैसे मामलों को समाधान के लिए लिया जा रहा है।

न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कहा कि मुकदमों में लगने वाला समय, खर्च और परिणाम को लेकर अनिश्चितता ऐसे प्रमुख कारण हैं, जो पक्षकारों को मध्यस्थता का विकल्प चुनने के लिए प्रेरित करते हैं।

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