सत्य निकेतन हादसा छात्रावास के अनियंत्रित बाजार को उजागर करता है : वाम संगठन

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सत्य निकेतन हादसा छात्रावास के अनियंत्रित बाजार को उजागर करता है : वाम संगठन

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  • Publish Date - September 17, 2026 / 07:33 PM IST,
    Updated On - September 17, 2026 / 07:33 PM IST

नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) वाम दलों से जुड़े छात्र, शिक्षक, श्रमिक और महिला संगठनों ने दिल्ली में विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित एवं किफायती आवासीय सुविधा की मांग करते हुए कहा है कि सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना ने शहर के ‘‘अनियंत्रित और मुनाफा केंद्रित’’ छात्रावास बाजार की स्थिति को उजागर किया है।

उन्होंने सत्य निकेतन इलाके में कराए गए अपने सर्वेक्षण के निष्कर्षों का हवाला देते हुए कहा कि 100 से अधिक विद्यार्थियों में से 79 प्रतिशत से ज्यादा ने कहा कि वे इमारत गिरने की घटना के बाद से अपनी सुरक्षा को लेकर डरे हुए हैं।

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई), दिल्ली टीचर्स फोरम (डीटीएफ), ‘ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक विमेन्स एसोसिएशन’ (एआईडीडब्ल्यूए) और ‘सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स ’(सीआईटीयू) की ओर से जारी संयुक्त विज्ञप्ति के अनुसार, सत्य निकेतन में पांच मंजिला ‘पेइंग गेस्ट’ (पीजी) इमारत के ढहने की घटना को महज एक इमारत दुर्घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

इन संगठनों ने आरोप लगाया कि यह घटना विश्वविद्यालयों में पर्याप्त छात्रावास सुविधाओं के अभाव, निजी पीजी आवासों के नियमन की कमी तथा सरकारी निगरानी और नियमों के अनुपालन में विफलता का नतीजा है।

उन्होंने बताया कि उन्होंने सत्य निकेतन में पीजी आवासों में रह रहे 117 विद्यार्थियों के बीच सर्वेक्षण किया।

उनके मुताबिक, ये विद्यार्थी कम से कम 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए हैं। इनमें से ज्यादातर दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर और आसपास के इलाकों के महाविद्यालयों में पढ़ रहे हैं।

सर्वेक्षण के अनुसार, पीजी का मासिक किराया 5,000 रुपये एवं 30,000 रुपये के बीच है, जबकि भोजन के साथ ‘डबल-शेयरिंग’ कमरे का औसत किराया करीब 14,000 रुपये है।

इस सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि सुरक्षा जमा राशि एक से तीन महीने के किराये के बराबर थी और कुछ मामलों में यह करीब 50,000 रुपये तक पहुंच गई।

इन संगठनों का दावा है कि सर्वेक्षण में शामिल कम से कम 31 प्रतिशत विद्यार्थियों ने बिचौलिए के माध्यम से आवास लिया और इसके लिए अतिरिक्त कमीशन का भुगतान किया।

भाषा हक राजकुमार

राजकुमार