राम मंदिर चढ़ावा विवाद में एसआईटी जांच जल्द पूरी करे, वस्तुस्थिति रिपोर्ट दाखिल करे : न्यायालय

राम मंदिर चढ़ावा विवाद में एसआईटी जांच जल्द पूरी करे, वस्तुस्थिति रिपोर्ट दाखिल करे : न्यायालय

राम मंदिर चढ़ावा विवाद में एसआईटी जांच जल्द पूरी करे, वस्तुस्थिति रिपोर्ट दाखिल करे : न्यायालय
Modified Date: August 17, 2026 / 06:34 pm IST
Published Date: August 17, 2026 6:34 pm IST

नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) से कहा कि वह अपनी जांच तेजी से पूरी करे और उसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुँचाए।

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने एसआईटी को निर्देश दिया कि वह कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच में हुई प्रगति पर अपनी वस्तुस्थिति रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल करे।

इसने कहा,, ‘‘एसआईटी, जिसमें एक फॉरेंसिक ऑडिटर भी शामिल है, उच्चतम न्यायालय को सीलबंद लिफ़ाफ़े में वस्तुस्थिति रिपोर्ट सौंपेगी। पहले हम इस रिपोर्ट को देखेंगे और तय करेंगे कि इसे सभी पक्षों को जारी करना है या नहीं।’’

पीठ ने अदालत द्वारा नियुक्त एसआईटी से यह भी कहा कि वह जांच की गुणवत्ता और पारदर्शिता में सुधार के लिए न्यायालय के सामने अलग-अलग पक्षकारों द्वारा दिए गए किसी भी सुझाव पर निष्पक्ष रूप से विचार करे।

इसने किसी स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई से अदालत की निगरानी में जांच का आग्रह कर रहे याचिकाकर्ताओं और जनहित में काम करने वाले अन्य लोगों को सॉलिसिटर जनरल के कार्यालय में सुझाव देने की अनुमति दे दी, जो चढ़ावा चोरी के आरोपों के संबंध में एसआईटी द्वारा की जाने वाली जांच के किसी भी पहलू पर हो सकते हैं।

पीठ ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का कार्यालय सुझावों को एसआईटी को भेजेगा, जिन पर निष्पक्ष रूप से विचार किया जाएगा।

इसने कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट की पड़ताल के बाद, न्यायालय राम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान के प्रबंधन में सुधार के लिए कुछ निर्देश जारी कर सकता है।

शीर्ष अदालत ने 27 जुलाई को कथित चढ़ावा चोरी की जांच के लिए पुलिस महानिरीक्षक किरण एस की अध्यक्षता में चार सदस्यीय एसआईटी के गठन का संज्ञान लिया था।

इसने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा था कि जांच टीम में एक फॉरेंसिक ऑडिटर भी शामिल किया जाना चाहिए।

यह उल्लेख करते हुए कि ‘‘सुधारात्मक कदम उठाने होंगे’’, पीठ ने कहा था कि ‘‘पारदर्शिता सुनिश्चित करने’’ के लिए कदम उठाए जाएंगे।

पीठ ने एसआईटी को दो हफ़्ते में वस्तुस्थिति रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया था।

इसने 20 जुलाई को उत्तर प्रदेश सरकार से कहा था कि वह मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने की संभावना के बारे में जानकारी दे।

पीठ ने 13 जुलाई को उत्तर प्रदेश पुलिस को इस मामले में वस्तुस्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।

भाषा नेत्रपाल दिलीप

दिलीप


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