न्यायालय ने एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक के अध्याय से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले को बंद किया

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न्यायालय ने एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक के अध्याय से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले को बंद किया

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  • Publish Date - September 1, 2026 / 08:55 PM IST,
    Updated On - September 1, 2026 / 08:55 PM IST

नयी दिल्ली, एक सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का जिक्र करने वाली एनसीईआरटी की कक्षा आठ की पाठ्यपुस्तक सामग्री से जुड़ी स्वतः संज्ञान वाली कार्यवाही मंगलवार को बंद कर दी, क्योंकि उसे बताया गया कि संबंधित अध्याय हटा दिया गया है।

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस बात पर गौर किया कि केंद्र द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति के सुझावों के आधार पर विवादित अध्याय को हटा दिया गया है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायालय को बताया कि अब नए अध्याय वाली पाठ्यपुस्तक पढ़ाई जा रही है।

शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया किया कि 22 मई के आदेश में दर्ज यह बात कि पाठ्यक्रम को सभी स्तरों पर समिति के सामने नहीं रखा गया था और इसलिए इसे सामूहिक निर्णय नहीं कहा जा सकता, केवल सॉलिसिटर जनरल मेहता का बयान था, न कि अदालत की कोई टिप्पणी या आदेश।

सॉलिसिटर जनरल ने स्पष्ट किया कि उन्होंने शिक्षाविदों पर समितियों के समक्ष पाठ्यक्रम न रखने का आरोप नहीं लगाया था।

मेहता ने कहा, ‘‘हमने कभी नहीं कहा कि उन्होंने इसे पेश नहीं किया था। मैंने वास्तव में बात यह कही थी कि पाठ्यक्रम को समिति के सामने नहीं रखा गया था और इसलिए यह कोई सामूहिक निर्णय नहीं था।’’

यह स्पष्टीकरण तब आया जब शिक्षाविदों में से एक की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने कहा कि अगर इन टिप्पणियों को न्यायिक निष्कर्ष मान लिया गया, तो इससे उन्हें नुकसान होगा।

पीठ एनसीईआरटी की कक्षा आठ से संबंधित सामाजिक विज्ञान की किताब से जुड़े एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में ‘‘आपत्तिजनक’’ बातें थीं।

भाषा

नेत्रपाल धीरज

धीरज