न्यायालय ने जनगणना के दौरान जातिगत गणना को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

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न्यायालय ने जनगणना के दौरान जातिगत गणना को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

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  • Publish Date - May 20, 2026 / 03:47 PM IST,
    Updated On - May 20, 2026 / 03:47 PM IST

नयी दिल्ली, 20 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने जाति आधारित जनगणना कराने संबंधी केंद्र सरकार के निर्णय को चुनौती देने वाली जनहित याचिका बुधवार को खारिज कर दी और कहा कि यह मुद्दा नीतिगत दायरे में आता है।

न्यायालय ने कहा कि सरकार को कल्याणकारी उपाय करने के लिए पिछड़ी जातियों से संबंधित व्यक्तियों की संख्या जानना आवश्यक है।

प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने याचिकाकर्ता सुधाकर गुम्मुला की दलीलों से असहमति जताई।

गुम्मुला दलीलें पेश करने के लिए खुद उपस्थित थे और उन्होंने कहा कि सरकार के पास जातिगत विवरणों से संबंधित पर्याप्त जानकारी और आंकड़े उपलब्ध हैं।

प्रधान न्यायाधीश ने जनहित याचिका खारिज करते हुए कहा, ‘‘जनगणना जाति आधारित होनी चाहिए या नहीं, ये सभी नीतिगत मामले हैं। इसमें गलत क्या है? सरकार को यह जानना चाहिए कि कितने लोग पिछड़े वर्ग में हैं, उनके लिए किस प्रकार के कल्याणकारी उपाय किए जाने हैं। यह नीतिगत दायरे में आता है।’’

2027 की जनगणना, जो आधिकारिक तौर पर 16वीं राष्ट्रीय जनगणना है, 1931 के बाद पहली बार व्यापक जातिवार गणना को शामिल करने वाली जनगणना होगी और यह देश की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना है।

भाषा सुभाष नरेश

नरेश