न्यायालय ने अगस्ता वेस्टलैंड के बिचौलिए जेम्स की जेल से रिहाई की अपील को दूसरी पीठ के पास भेजा

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न्यायालय ने अगस्ता वेस्टलैंड के बिचौलिए जेम्स की जेल से रिहाई की अपील को दूसरी पीठ के पास भेजा

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  • Publish Date - April 24, 2026 / 01:00 PM IST,
    Updated On - April 24, 2026 / 01:00 PM IST

नयी दिल्ली, 24 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने 3,600 करोड़ रुपये के अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाला मामले में कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल जेम्स की जेल से रिहाई संबंधी अपील को शुक्रवार को दूसरी पीठ के पास भेज दिया।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने आठ अप्रैल को इस मामले में ब्रिटिश नागरिक जेम्स की याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि दिसंबर 2018 में दुबई से प्रत्यर्पित किए गए जेम्स की याचिका में कोई दम नहीं है।

भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने इस तथ्य पर गौर किया कि आरोपी की पिछली याचिकाओं पर न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई की थी।

सीजेआई ने कहा, ‘‘इस मामले को न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष भेजा जाए।’’

अपनी याचिका में जेम्स ने भारत-संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) प्रत्यर्पण संधि के एक प्रावधान को चुनौती दी है। उन्होंने सात अगस्त 2025 के निचली अदालत के उस आदेश को भी चुनौती दी, जिसमें दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 436ए के तहत जेल से रिहाई की उनकी अर्जी खारिज कर दी गई थी।

जेम्स ने 1999 में हस्ताक्षरित संधि के अनुच्छेद 17 को चुनौती दी, जो अनुरोध करने वाले देश (इस मामले में भारत) को प्रत्यर्पित व्यक्ति पर केवल उसी अपराध के लिए नहीं, बल्कि उससे जुड़े अन्य अपराधों में भी मुकदमा चलाने की अनुमति देता है।

उच्च न्यायालय में दलील दी गई थी कि प्रत्यर्पित व्यक्ति पर केवल उन्हीं अपराधों में मुकदमा चलाया जा सकता है, जिनके लिए प्रत्यर्पण हुआ है, न कि संबंधित अन्य अपराधों में।

जेम्स ने याचिका में कहा कि उसने चार दिसंबर 2025 को जेल में सात वर्ष पूरे कर लिए और जिन अपराधों के लिए उसका प्रत्यर्पण हुआ था, उनमें अधिकतम संभावित सजा की अवधि पूरी हो चुकी है इसलिए भारत में उसकी निरंतर हिरासत अवैध है।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि संधि से जुड़े मुद्दों को जेम्स दोबारा नहीं उठा सकते, क्योंकि इन पर उच्चतम न्यायालय पहले ही प्रथम दृष्टया विचार कर चुका है।

प्रत्यर्पण के बाद जेम्स को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया था।

जेम्स इस मामले में जांच के दायरे में तीन कथित बिचौलियों में से एक है। अन्य दो गुइडो हास्के और कार्लो गेरोसा हैं।

उसे फरवरी 2025 में सीबीआई मामले में उच्चतम न्यायालय से जमानत मिली थी। उसी वर्ष मार्च में उच्च न्यायालय ने ईडी मामले में भी उसे जमानत दे दी थी। हालांकि, जेम्स अब भी जेल में हैं क्योंकि वह जमानत की शर्तें पूरी नहीं कर सका।

निचली अदालत ने सीबीआई मामले में रिहाई के लिए जेम्स को पांच लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि की नकद जमानत देने को कहा था। ईडी मामले में उच्च न्यायालय ने पांच लाख रुपये का निजी मुचलका और 10 लाख रुपये की नकद जमानत जमा करने को कहा था।

उच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया था कि जेम्स को समाप्त हो चुके पासपोर्ट को जमा किए बिना भी तुरंत रिहा किया जा सकता है।

अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया था कि नया पासपोर्ट तैयार होने पर सीधे निचली अदालत में जमा कराया जाए।

उच्च न्यायालय ने विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) को यह सुनिश्चित करने को भी कहा था कि जेम्स देश छोड़कर न जाए।

सीबीआई ने अपने आरोपपत्र में आरोप लगाया है कि आठ फरवरी 2010 को करीब 556.26 मिलियन यूरो मूल्य के वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति के लिए हुए सौदे से सरकारी खजाने को अनुमानित करीब 2,666 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

ईडी ने जून 2016 में जेम्स के खिलाफ दायर आरोपपत्र में आरोप लगाया था कि उसे अगस्ता वेस्टलैंड से करीब 225 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे।

भाषा गोला मनीषा

मनीषा