CG Digital Arrest : अनजान शख्स का कॉल उठाना पड़ा महंगा! देखते ही देखते गवां बैठे इतने लाख रुपए, पुलिस ने की छानबीन तो हुआ बड़ा खुलासा

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CG Digital Arrest : पुलिस और साइबर सेल की टीम ने बिजली विभाग के रिटायर्ड कर्मचारी से 37 लाख की ठगी के पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

CG Digital Arrest | Photo Credit: AI

HIGHLIGHTS
  • रायगढ़ में 37 लाख की साइबर ठगी का बड़ा खुलासा
  • डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर रिटायर्ड कर्मचारी को बनाया शिकार
  • मास्टरमाइंड समेत 5 आरोपी गिरफ्तार

रायगढ़। CG Digital Arrest : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बिजली विभाग के रिटायर्ड कर्मचारी से 37 लाख की ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह के मास्टरमाइंड समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी टेलीकॉम अधिकारी, फर्जी IPS और CBI अफसर बनकर लोगों को अपना शिकार बनाकर ठगी करते थे। इसी तरह ही आरोपियों ने डिजिटल अरेस्ट कर बिजली विभाग के रिटायर्ड कर्मचारी से 37 लाख की ठगी की थी। इस मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों को राजस्थान के भीलवाड़ा से गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि गिरोह का मास्टरमाइंड बंधन बैंक का कर्मचारी है (CG Digital Arrest)। वहीं आरोपियों में महिला भी शामिल है।

पीड़ित ने बताया कि वह जनवरी 2022 में बिजली विभाग के सुपरवाइजर के पद से रिटायर्ड हुआ है। 14 जनवरी 2026 को एक अज्ञात महिला का कॉल आया, जिसने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया से संबंधित बताते हुए कहा कि उसके पहचान पत्र का उपयोग कर फर्जी सिम लेकर गलत उपयोग किया जा रहा है। इतना ही नहीं शातिरों ने दिल्ली के बारह खंभा रोड पुलिस स्टेशन के फर्जी अधिकारी से कनेक्ट कराया गया, जिन्होंने पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तारी की धमकी दी।

इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने वीडियो कॉल कर स्वयं को आईपीएस अधिकारी नीरज ठाकुर बताया और पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाते हुए उसे जांच में सहयोग का झांसा देकर ठगों ने पीड़ित से उसके बैंक खाते, संपत्ति और अन्य वित्तीय जानकारी ली तथा यह कहकर अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवाई। ठगों की धमकी और दबाव में आकर पीड़ित ने 30 जनवरी से 11 फरवरी 2026 के बीच कुल 36,97,117 रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। बाद में ठगी का अहसास हुआ, जिसके बाद साइबर थाना में तत्काल रिपोर्ट करने पर उसी समय साइबर पुलिस रायगढ़ ने पीड़ित के लगभग 2 लाख रुपये होल्ड कराया गया।

बंधन बैंक का कर्मचारी निकला मास्टरमाइंड (CG Digital Arrest)

पीड़ित के रिपोर्ट पर जाँच कर रही रायगढ़ साइबर टीम को तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पता चला कि पीड़ित द्वारा आरोपियों को भेजे गए 4.50 लाख रूपये भीलवाडा राजस्थान के बैंकों में जमा है, बैंक डिटेल और तकनीकी साक्ष्य जुटा कर आरोपियों का पता लगाया गया। जांच के दौरान बंधन बैंक भीलवाड़ा के एम्पलाई राहुल व्यास की संलिप्तता पाई गई, जो इस ठगी का मास्टरमाइंड है। पूछताछ में पूरे गैंग का खुलासा हुआ। पुलिस ने राहुल व्यास से पूछताछ कर उसके गिरोह के आरोपी रविराज सिंह उसकी पत्नी आरती राजपूत आरोपी संजय मीणा और गौरव व्यास को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार कर रिमांड पर रायगढ़ लाया गया है।

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डिजिटल अरेस्ट क्या होता है?

डिजिटल अरेस्ट एक साइबर फ्रॉड तकनीक है, जिसमें ठग खुद को पुलिस या एजेंसी का अधिकारी बताकर व्यक्ति को वीडियो कॉल या फोन पर “गिरफ्तार” जैसा माहौल बनाकर डराते हैं।

ठग किस तरह लोगों को फंसाते हैं?

वे फर्जी पहचान (IPS, CBI, टेलीकॉम अधिकारी) बनाकर कॉल करते हैं और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।

ऐसे फ्रॉड से कैसे बचें?

किसी भी अनजान कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी या पैसे साझा न करें। सरकारी एजेंसियां इस तरह फोन या वीडियो कॉल पर कार्रवाई नहीं करतीं।

अगर कोई साइबर ठगी का शिकार हो जाए तो क्या करें?

तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

क्या पुलिस ऐसे मामलों में मदद करती है?

हाँ, साइबर सेल और पुलिस ऐसे मामलों की जांच कर आरोपियों को पकड़ने के लिए लगातार कार्रवाई करती है।