तमिलनाडु चुनाव याचिकाओं के शीघ्र निस्तारण की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से न्यायालय का इनकार

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तमिलनाडु चुनाव याचिकाओं के शीघ्र निस्तारण की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से न्यायालय का इनकार

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  • Publish Date - July 16, 2026 / 02:07 PM IST,
    Updated On - July 16, 2026 / 02:07 PM IST

नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को मद्रास उच्च न्यायालय को 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से संबंधित 54 चुनाव याचिकाओं का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने का निर्देश देने के अनुरोध वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।

अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) ने इस वर्ष 23 अप्रैल को हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी।

भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता के. वेंकटचलपति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी. एस. नायडू ने दलील दी कि मद्रास उच्च न्यायालय को चुनाव याचिकाओं के समयबद्ध निस्तारण के लिए एक विशेष पीठ गठित करने का निर्देश दिया जाए।

इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘इससे एक गलत नजीर स्थापित होगी।’’ इसके साथ ही पीठ ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।

बहरहाल, पीठ ने याचिकाकर्ता को आवश्यक राहत के लिए मद्रास उच्च न्यायालय का रुख करने की छूट प्रदान की।

अधिवक्ता समीर मलिक के माध्यम से दायर याचिका में अनुरोध किया गया था कि मद्रास उच्च न्यायालय में लंबित तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से संबंधित 54 चुनाव याचिकाओं का छह महीने की समय-सीमा के भीतर निस्तारण करने का निर्देश दिया जाए। याचिका में कहा गया था कि यह अवधि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (आरपीए) की धारा 86(7) में निर्धारित है या फिर न्यायालय जिस अवधि को उचित समझे, उसके भीतर इन याचिकाओं का निपटारा कराया जाए।’’

याचिका में कहा गया कि तीन जून से 18 जून के बीच दायर इन चुनाव याचिकाओं में चार मई को घोषित तमिलनाडु विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के चुनाव परिणामों की वैधता को चुनौती दी गई है।

याचिका के अनुसार, इन विवादों के लंबे समय तक लंबित रहने से जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के पीछे की विधायी मंशा विफल हो जाती है।

भाषा गोला मनीषा

मनीषा