न्यायालय ने वकीलों की राष्ट्रीय डिजिटल रजिस्ट्री के लिए याचिका पर केंद्र, बीसीआई से जवाब मांगा

न्यायालय ने वकीलों की राष्ट्रीय डिजिटल रजिस्ट्री के लिए याचिका पर केंद्र, बीसीआई से जवाब मांगा

न्यायालय ने वकीलों की राष्ट्रीय डिजिटल रजिस्ट्री के लिए याचिका पर केंद्र, बीसीआई से जवाब मांगा
Modified Date: June 18, 2026 / 07:03 pm IST
Published Date: June 18, 2026 7:03 pm IST

नयी दिल्ली, 18 जून (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और अन्य से उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें देश में कानून के पेशे से जुड़े लोगों के लिए एक ‘राष्ट्रीय डिजिटल रजिस्ट्री’ बनाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

इस रजिस्ट्री में, प्रत्येक पंजीकृत वकील के लिए एक अनूठा राष्ट्रीय अधिवक्ता पहचान संख्या या कोड भी होगा, ताकि नकली वकीलों पर रोक लगाई जा सके।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि यह विचार नया और अनूठा लगता है और इसे प्रौद्योगिकी की मदद से किया जा सकता है।

बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया (बीएआई) की तरफ से दायर याचिका में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वह अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 49 के तहत सोशल मीडिया और डिजिटल आचार संहिता बनाए।

अधिवक्ता विपिन नायर और प्रशांत कुमार बीएआई की ओर से पेश हुए।

न्यायालय ने केंद्र सरकार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और अन्य को नोटिस जारी कर याचिका पर उनका जवाब मांगा और मामले की सुनवाई जुलाई के लिए तय कर दी।

सुनवाई के दौरान, प्रधान न्यायाधीश ने बार के युवा सदस्यों को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि उन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

याचिकाकर्ता के वकील ने जब वकीलों के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल आचार संहिता के मुद्दे का जिक्र किया, तो पीठ ने कहा कि उसने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कुछ ‘‘भद्दी टिप्पणियां’’ देखी हैं।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम आपको इनके कुछ उदाहरण दिखाएंगे। किस तरह की भद्दी टिप्पणियां की जा रही हैं और हमें यकीन है कि उन लोगों का कानून (के पेशे) से कोई लेना-देना नहीं है।’’

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि वकील जिम्मेदार होते हैं और साथ ही यह भी उल्लेख किया कि वे सबसे पहले पेशेवर नैतिकता ही सीखते हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘वे (वकील) ऐसी चीजों में शामिल नहीं होंगे। जो लोग ऐसा कर रहे हैं और पेशे को बदनाम कर रहे हैं, हो सकता है कि वे असल में इस पेशे में न हों।’’

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि सबसे अच्छी बात बार के युवा सदस्यों को मजबूत बनाना है।

उन्होंने कहा कि कुछ उच्च न्यायालयों और यहां तक कि कुछ जिला अदालतों में भी, बार के युवा सदस्यों ने एसोसिएशन बनाई हैं और वे रचनात्मक अकादमिक गतिविधियों और कानूनी मुद्दों पर चर्चा में शामिल हो रहे हैं।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हमारी सारी उम्मीदें बार के युवा सदस्यों और इस पेशे की आने वाली पीढ़ी पर टिकी हैं।’’

पीठ ने यह भी कहा कि इस मामले में विधि विश्वविद्यालयों को भी पक्षकार बनाना होगा।

बीएआई के वकील ने कहा कि उन्होंने याचिका में यूजीसी को पहले ही प्रतिवादी बना दिया है।

याचिका में कहा गया है कि भारत में लगभग 18 लाख पंजीकृत वकील हैं, लेकिन इस बारे में ऐसा कोई एक भी राष्ट्रीय, सार्वजनिक रूप से सत्यापित किये जाने योग्य ‘रियल टाइम’ राष्ट्रीय रिकॉर्ड नहीं है जिससे यह पता चल सके कि कौन वास्तव में पंजीकृत है और प्रमाणिक योग्यताएं रखता है।

भाषा सुभाष पवनेश

पवनेश


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