EPF Interest Rate: 8.25% ब्याज दर पर बड़ा फैसला, FY26 के लिए सरकार ने दी हरी झंडी! लेकिन क्या इस महीने आएगा पैसा या करना पड़ेगा इंतजार? जानें पूरा सच
EPF Interest Rate: केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए EPF पर 8.25% ब्याज दर को मंजूरी दे दी है। इससे 7 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। उम्मीद है कि इस महीने उनके खातों में ब्याज की राशि जमा कर दी जाएगी।
(EPF Interest Rate/ Image Credit: AI-generated)
- EPF पर 2025-26 के लिए 8.25% ब्याज दर मंजूर।
- फैसला केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय की मंजूरी के बाद लागू।
- करीब 7 करोड़ कर्मचारियों को मिलेगा सीधा फायदा।
नई दिल्ली: EPF Interest Rate: सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट में बताया गया कि केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) जमा पर 8.25 प्रतिशत ब्याज दर को मंजूरी दे दी है। यह जानकारी गुरुवार 18 जून 2026 को सामने आई एक रिपोर्ट में दी गई है। इस फैसले के बाद देश के करोड़ों कर्मचारियों को उनके EPF खाते पर पहले की तरह ही ब्याज मिलता रहेगा।
सात करोड़ से ज्यादा खाताधारकों को फायदा
इस फैसले से देश के लगभग सात करोड़ से अधिक EPF सब्सक्राइबर्स को लाभ मिलेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इस महीने ही कर्मचारियों के खातों में ब्याज की राशि जमा होने की संभावना है। सरकार की मंजूरी के बाद EPFO अब ब्याज राशि को खातों में क्रेडिट करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है।
मंजूरी के बाद क्या होता है?
EPFO किसी भी वित्त वर्ष के लिए ब्याज दर तय करता है। लेकिन इसे लागू करने के लिए वित्त मंत्रालय की मंजूरी जरूरी होती है। मंत्रालय की मंजूरी के बाद ही ब्याज दर को औपचारिक रूप से घोषित किया जाता है और फिर उसे कर्मचारियों के खातों में जोड़ा जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत 8.25% ब्याज दर को अब हरी झंडी मिल गई है।
CBT की बैठक में लिया गया था फैसला
2 मार्च 2026 को केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया की अध्यक्षता में हुई सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की बैठक में यह तय किया गया था कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए EPF पर 8.25 प्रतिशत ब्याज दर ही बरकरार रखी जाएगी। यह लगातार तीसरा साल है जब ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसके बाद प्रस्ताव को मंजूरी के लिए वित्त मंत्रालय को भेजा गया था।
EPF ब्याज दर का इतिहास
EPF ब्याज दर पिछले कई वर्षों में समय-समय पर बदलती रही है। वर्ष 2023-24 और 2024-25 में भी इसे 8.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया था। इससे पहले 2021-22 में यह 8.10 प्रतिशत तक गिर गया था जो कई दशकों का निचला स्तर था। वहीं 2020-21 में यह 8.5 प्रतिशत था। 2015 से 2019 के बीच ब्याज दर 8.5 प्रतिशत से 8.8 प्रतिशत के बीच रही है। इस बार भी स्थिर दर बनाए रखने से कर्मचारियों को स्थिर रिटर्न मिलने की उम्मीद है।
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